RAS प्रश्न
राजस्थान में आहड़-बनास संस्कृति किस काल से संबंधित है?
सही उत्तर: (B) ताम्रपाषाण काल।
राजस्थान की आहड़-बनास संस्कृति ताम्रपाषाण काल से संबंधित है।
व्याख्या
आहड़-बनास संस्कृति को ताम्रपाषाण काल की संस्कृति मानना इसलिए सही है, क्योंकि यह दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में लगभग 3000 से 1500 ई.पू. तक फली-फूली ताम्र-पाषाण युगीन संस्कृति है। Ancient Asia शोध-पत्र में पचमता राजस्थान का आहड़ ताम्रपाषाण स्थल है और आहड़ ताम्रपाषाण संस्कृति लगभग 3200-1700 ई.पू. के दायरे में रखी गई है। पचमता की परतों में प्रारंभिक ऐतिहासिक स्तर के नीचे आहड़ ताम्रपाषाण संस्कृति के ठोस अवशेष मिलते हैं। इसलिए काल-निर्धारण का निर्णायक संकेत “ताम्रपाषाण” है, न कि पाषाण युग का कोई पुराना चरण या बाद का लौह युग।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) मध्यपाषाण काल आहड़-बनास संस्कृति से पहले का चरण है, जबकि आहड़-बनास संस्कृति ताम्रपाषाण संस्कृति के रूप में मानी जाती है।
- (C) पुरापाषाण काल बहुत अधिक प्राचीन है; आहड़-बनास की काल-सीमा 3000 से 1500 ई.पू. और लगभग 3200-1700 ई.पू. के ताम्रपाषाण संदर्भ में आती है।
- (D) लौह युग इस क्षेत्र में ताम्रपाषाण के बाद का चरण है, जबकि पचमता और आहड़-बनास परंपरा आहड़ ताम्रपाषाण संस्कृति से जुड़ती है।
अवधारणा
राजस्थान के प्रागैतिहासिक और आद्य-ऐतिहासिक सांस्कृतिक क्रम में आहड़-बनास संस्कृति की काल-स्थिति ताम्रपाषाण काल में आती है। RAS में स्थल, काल और सांस्कृतिक पहचान को अलग-अलग नहीं, साथ पढ़ना पड़ता है।
