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RAS प्रश्न

91वें संशोधन अधिनियम, 2003 ने दल-बदल विरोधी कानून में क्या परिवर्तन किया?

सही उत्तर: (B) विभाजन के मामले में अयोग्यता से छूट के प्रावधान को हटा दिया।

91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 ने दसवीं अनुसूची का पैराग्राफ 3 हटाकर विभाजन के आधार पर अयोग्यता से मिलने वाली छूट समाप्त कर दी।

  1. (A)

    विलय की सीमा एक-तिहाई से बढ़ाकर दो-तिहाई कर दी

  2. (B)

    विभाजन के मामले में अयोग्यता से छूट के प्रावधान को हटा दिया

  3. (C)

    अध्यक्ष के निर्णय को न्यायिक समीक्षा के अधीन कर दिया

  4. (D)

    कानून को स्थानीय निकायों तक विस्तारित किया

व्याख्या

दल-बदल विरोधी कानून दसवीं अनुसूची में है। पहले पैराग्राफ 3 के कारण यदि किसी दल के एक-तिहाई सदस्य अलग होकर विभाजन का दावा करते थे, तो उन्हें अयोग्यता से छूट मिल सकती थी। 91वें संशोधन अधिनियम, 2003 ने यही पैराग्राफ 3 हटा दिया। आधिकारिक संविधान पाठ की टिप्पणी भी कहती है कि पैराग्राफ 3 को 91वें संशोधन अधिनियम, 2003 की धारा 5 से हटाया गया। इसके बाद छूट का मुख्य रास्ता केवल पैराग्राफ 4 का विलय है, और वह तभी माना जाएगा जब संबंधित विधायिका दल के कम-से-कम दो-तिहाई सदस्य विलय से सहमत हों। इसलिए बदलाव विभाजन-छूट हटाने का था, विलय-छूट बनाने का नहीं।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) A गलत है, क्योंकि विलय के लिए दो-तिहाई सदस्यों की शर्त पैराग्राफ 4 में है; 91वें संशोधन का निर्णायक बदलाव एक-तिहाई विभाजन वाली छूट हटाना था।
  • (C) C गलत है, क्योंकि आधिकारिक पाठ में 91वें संशोधन से अध्यक्ष के निर्णय को न्यायिक समीक्षा के अधीन करने की बात नहीं है।
  • (D) D गलत है, क्योंकि 91वें संशोधन ने दसवीं अनुसूची में विभाजन-छूट हटाई; इसे स्थानीय निकायों तक फैलाने का परिवर्तन यहां समर्थित नहीं है।

अवधारणा

यह प्रश्न दल-बदल विरोधी कानून और दसवीं अनुसूची में संशोधन की बारीक सीमा जांचता है। RAS में ऐसे प्रश्न बार-बार आते हैं क्योंकि विकल्प अक्सर विभाजन, विलय और अध्यक्ष की भूमिका को मिलाकर भ्रम पैदा करते हैं।

स्रोत

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