RAS प्रश्न
सुश्रुत संहिता, शल्यचिकित्सा का प्राचीन भारतीय ग्रंथ, किसका वर्णन करता है?
सही उत्तर: (C) राइनोप्लास्टी (नाक पुनर्निर्माण), मोतियाबिंद शल्यचिकित्सा और 300 से अधिक शल्य प्रक्रियाएँ।
सुश्रुत संहिता में नाक के पुनर्निर्माण, मोतियाबिंद की शल्यचिकित्सा और 300 से अधिक शल्य प्रक्रियाओं का वर्णन है।
व्याख्या
यह प्रश्न सुश्रुत संहिता को केवल औषधि-ग्रंथ मानने की सामान्य भूल पकड़ता है। यह ग्रंथ सुश्रुत से संबंधित है और इसमें नाक का पुनर्निर्माण, मोतियाबिंद शल्यचिकित्सा, सिजेरियन प्रसव और 300 से अधिक शल्य प्रक्रियाएँ बताई गई हैं। ग्रंथ का मुख्य महत्व व्यवस्थित शल्य तकनीकों, खासकर नाक पुनर्निर्माण और आँख की शल्यचिकित्सा, से जुड़ा है; यह केवल दवा, दाँत या हड्डी तक सीमित पाठ नहीं है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) ग्रंथ में 300 से अधिक शल्य प्रक्रियाएँ हैं, इसलिए इसे केवल जड़ी-बूटी उपचार तक सीमित करना तथ्य को बहुत छोटा कर देता है।
- (B) मोतियाबिंद शल्यचिकित्सा और नाक पुनर्निर्माण स्वयं दंत चिकित्सा से बाहर हैं, इसलिए “केवल दंत चिकित्सा” वाला दावा नहीं टिकता।
- (D) ग्रंथ की चर्चा नाक पुनर्निर्माण, मोतियाबिंद और सिजेरियन प्रसव जैसी कई प्रक्रियाओं तक जाती है, इसलिए इसे केवल हड्डी जोड़ने का ग्रंथ कहना गलत सीमा बाँधना है।
अवधारणा
यह प्रश्न प्राचीन भारत में विज्ञान, चिकित्सा और आयुर्वेदिक शल्य परंपरा की पहचान परखता है। RAS में ऐसे तथ्य बार-बार आते हैं क्योंकि उनसे सांस्कृतिक इतिहास को विज्ञान और तकनीक के योगदान से जोड़ा जाता है।
