RAS प्रश्न
सूरदास का 'सूरसागर' मुख्य रूप से किसे समर्पित है?
सही उत्तर: (D) भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं और यौवन चेष्टाओं।
सूरदास का सूरसागर मुख्य रूप से भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं और यौवन चेष्टाओं के वर्णन को समर्पित है।
व्याख्या
सूरदास का सूरसागर सामान्य धार्मिक काव्य-संग्रह नहीं, बल्कि कृष्ण-भक्ति से जुड़ा ब्रजभाषा काव्य है। इसमें लगभग 5,000 पद हैं और उनका मुख्य विषय भगवान कृष्ण की बाल लीलाएँ तथा यौवन चेष्टाएँ हैं। Encyclopaedia Britannica सूरदास को उत्तर भारत का भक्त कवि बताती है, जिनकी रचनाएँ विशेष रूप से कृष्ण को संबोधित मानी जाती हैं। Encyclopaedia Britannica के अनुसार सूरसागर की आधुनिक प्रतिष्ठा कृष्ण को प्रिय बालक के रूप में चित्रित करने पर केंद्रित है, जबकि उसके पुराने रूप में कृष्ण और राधा के यौवन-प्रेम प्रसंग भी प्रमुख हैं। इसी कारण भगवान कृष्ण की बाल लीलाएँ और यौवन चेष्टाएँ इसका मुख्य विषय हैं।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) सूफी रहस्यवाद सूरसागर का मुख्य विषय नहीं है, क्योंकि सूरदास का काव्य कृष्ण-भक्ति और कृष्ण-केंद्रित पदों से जुड़ा है।
- (B) शिव की कथाएँ इस कृति का प्रमुख आधार नहीं हैं; सूरसागर के लगभग 5,000 पद मुख्य रूप से कृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े हैं।
- (C) भगवान राम का जीवन मुख्य विषय नहीं है; Encyclopaedia Britannica रामायण के प्रसंगों की उपस्थिति बताती है, पर सूरसागर की प्रतिष्ठा कृष्ण के बाल और यौवन प्रसंगों पर केंद्रित है।
अवधारणा
मध्यकालीन भक्ति आंदोलन में कृष्ण-भक्ति और ब्रजभाषा साहित्य की पहचान महत्वपूर्ण है। RAS में कवि, कृति और आराध्य-विषय का मिलान सांस्कृतिक इतिहास का स्थायी हिस्सा है।
