RAS प्रश्न
राज्य का दर्जा देने के साथ-साथ सोनम वांगचुक लद्दाख को कौन-सा संवैधानिक संरक्षण दिलाने की मांग कर रहे थे?
सही उत्तर: (D) छठी अनुसूची का संरक्षण।
सोनम वांगचुक की मांग थी कि लद्दाख को राज्य का दर्जा मिले और वहाँ छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक संरक्षण लागू हो।
व्याख्या
सोनम वांगचुक के विरोध प्रदर्शन से जुड़ी दो मांगें थीं—लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले और वहाँ छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक संरक्षण लागू हो। लद्दाख पर पत्र सूचना कार्यालय की विज्ञप्ति के अनुसार, वांगचुक ने 10 सितंबर 2025 को इन्हीं मांगों को लेकर अनशन शुरू किया था। विज्ञप्ति में यह भी बताया गया है कि उच्चस्तरीय समिति के तहत लद्दाख के प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत में ये मुद्दे शामिल थे। यह प्रश्न छठी अनुसूची के तहत लद्दाख के आदिवासी समुदायों के लिए मांगे गए संवैधानिक संरक्षण के बारे में है। बाद में सितंबर 2025 में हुए प्रदर्शन, जो उनकी हिरासत से पहले हुए थे, हिंसक हो गए और उनमें 4 लोगों की मृत्यु हुई। यह घटना केवल पृष्ठभूमि है; सही उत्तर छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक संरक्षण है।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) विरोध प्रदर्शन में पाँचवीं अनुसूची के तहत संरक्षण की मांग नहीं की गई थी। मांग लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत संरक्षण देने और राज्य का दर्जा देने की थी।
- (B) अनुच्छेद 370 के तहत संरक्षण की मांग नहीं की गई थी। विरोध प्रदर्शन में लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत संरक्षण और राज्य का दर्जा देने की मांग की गई थी।
- (C) विशेष श्रेणी का दर्जा वित्तीय या नीतिगत श्रेणी है, जबकि वांगचुक ने लद्दाख के लिए संवैधानिक संरक्षण की मांग की थी। यह मांग छठी अनुसूची के तहत संरक्षण और राज्य का दर्जा देने की थी।
अवधारणा
इस प्रश्न में आदिवासी समुदायों और विशेष क्षेत्रों के शासन से जुड़े संवैधानिक सुरक्षा उपायों की समझ परखी जाती है। इसका मुख्य बिंदु अलग-अलग अनुसूचियों और दर्जे से जुड़ी मांगों के बीच अंतर है। यह विषय RAS में बार-बार पूछा जाता है, क्योंकि लद्दाख से जुड़े विरोध प्रदर्शन समसामयिक घटनाओं को संघवाद और संवैधानिक संरक्षण की व्यवस्थाओं से जोड़ते हैं।
