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RAS प्रश्न

शेख अहमद सरहिंदी के 'वहदत-उल-शुहूद' सिद्धांत का वहदत-उल-वुजूद से अंतर यह है कि:

सही उत्तर: (D) यह मानता है कि ईश्वर और सृष्टि अलग हैं — एकता केवल प्रतीति या अनुभव में है, सार में नहीं।

शेख अहमद सरहिंदी के वहदत-उल-शुहूद के अनुसार ईश्वर और सृष्टि अलग हैं; एकता केवल अनुभव या प्रतीति में है, वास्तविक अस्तित्व में नहीं।

  1. (A)

    यह वहदत-उल-वुजूद के समान है

  2. (B)

    यह ईश्वर के अस्तित्व को नकारता है

  3. (C)

    यह बहुदेववाद को बढ़ावा देता है

  4. (D)

    यह मानता है कि ईश्वर और सृष्टि अलग हैं — एकता केवल प्रतीति या अनुभव में है, सार में नहीं

व्याख्या

वहदत-उल-शुहूद का मुख्य अंतर यही है कि यह ईश्वर और सृष्टि को अस्तित्वगत रूप से एक नहीं मानता। Britannica के अनुसार सरहिंदी ने वहदत-उल-वुजूद के स्थान पर वहदत-अश-शुहूद, यानी दृष्टि या अनुभव की एकता, की धारणा रखी। इस मत में साधक को ईश्वर और उसके बनाए जगत के बीच एकता का अनुभव हो सकता है, पर वह अनुभव व्यक्तिपरक है और विश्व की वास्तविक संरचना में उसकी वस्तुनिष्ठ समानता नहीं है। इसलिए एकता चेतना या शुहूद में है, वुजूद या वास्तविक अस्तित्व में नहीं। इसी कारण विकल्प D सही बैठता है: ईश्वर और सृष्टि भिन्न हैं, केवल अनुभव में एकता प्रतीत होती है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) वहदत-उल-शुहूद वहदत-उल-वुजूद के समान नहीं है, क्योंकि इसमें एकता को वास्तविक अस्तित्व नहीं बल्कि अनुभव या दृष्टि तक सीमित माना गया है।
  • (B) यह सिद्धांत ईश्वर के अस्तित्व को नहीं नकारता; इसके उलट, यह ईश्वर और सृष्टि के भेद को बनाए रखते हुए साधक के एकता-अनुभव को समझाता है।
  • (C) यह बहुदेववाद को बढ़ावा नहीं देता, क्योंकि इसमें ईश्वर और सृष्टि को अलग माना गया है और अनेक देवताओं की स्थापना नहीं की गई है।

अवधारणा

यह प्रश्न मध्यकालीन भारत में सूफी विचारधाराओं और उनके दार्शनिक मतभेदों की समझ जाँचता है। RAS में ऐसे प्रश्न इसलिए आते हैं क्योंकि धार्मिक-सांस्कृतिक प्रवृत्तियों को व्यक्ति, सिद्धांत और ऐतिहासिक संदर्भ के साथ जोड़कर पूछा जाता है।

स्रोत

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