RAS प्रश्न
शंकराचार्य ने किस दर्शन का प्रतिपादन किया?
सही उत्तर: (D) अद्वैत अर्थात द्वैत का अभाव।
आदि शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत का प्रतिपादन किया, जिसमें जीवात्मा और परमात्मा की एकता मानी जाती है।
व्याख्या
आदि शंकराचार्य 8वीं शताब्दी ई. के दार्शनिक थे और उन्होंने अद्वैत वेदांत का प्रतिपादन किया। NCERT के अनुसार वे अद्वैत, यानी जीवात्मा और परमात्मा की एकता के सिद्धांत, के समर्थक थे। उनके मत में ब्रह्म ही एकमात्र या अंतिम सत्य है; वह निराकार और गुणरहित है। वे हमारे आसपास के जगत को माया मानते थे और ब्रह्म के वास्तविक स्वरूप को समझने के लिए ज्ञान के मार्ग तथा संसार-त्याग पर बल देते थे। इसलिए आदि शंकराचार्य से जुड़ा दर्शन अद्वैत है, वेदांत की वे बाद की धाराएँ नहीं जो अन्य आचार्यों से जुड़ी हैं। उन्होंने श्रृंगेरी, पुरी, द्वारका और जोशीमठ में चार मठों की स्थापना भी की।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) विशिष्टाद्वैत शंकराचार्य का मत नहीं है; इसका प्रतिपादन रामानुज ने किया था।
- (B) द्वैत अद्वैत के विपरीत अलग दार्शनिक मत है; यह मध्वाचार्य से जुड़ा है।
- (C) शुद्धाद्वैत भी शंकराचार्य का प्रतिपादित दर्शन नहीं है; यह वल्लभाचार्य से संबंधित है।
अवधारणा
प्राचीन-मध्यकालीन भारत में भक्ति और दर्शन की प्रमुख वेदांत परंपराओं की पहचान RAS के लिए महत्त्वपूर्ण है। एक जैसे नामों वाले आचार्य और दर्शन अक्सर विकल्पों में उलझाते हैं।
