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RAS प्रश्न

निम्बार्क ने कौन सा दर्शन प्रतिपादित किया?

सही उत्तर: (C) द्वैताद्वैत अर्थात द्वैत और अद्वैत का समन्वित मत।

निम्बार्क ने द्वैताद्वैत या भेदाभेद दर्शन प्रतिपादित किया, जिसमें ब्रह्म, आत्मा और पदार्थ वास्तविक माने जाते हैं और आत्मा-ब्रह्म का संबंध भिन्नता और अभिन्नता दोनों से समझाया जाता है।

  1. (A)

    अद्वैत

  2. (B)

    शुद्धाद्वैत

  3. (C)

    द्वैताद्वैत अर्थात द्वैत और अद्वैत का समन्वित मत

  4. (D)

    द्वैत

व्याख्या

निम्बार्क का दर्शन द्वैताद्वैत कहलाता है, जिसे Britannica भेदाभेद के रूप में समझाता है, क्योंकि इसमें ब्रह्म के साथ जगत और सीमित आत्माओं की भिन्नता और अभिन्नता दोनों पर जोर है। इस मत में ब्रह्म, आत्माएँ और पदार्थ सभी वास्तविक हैं; इसलिए यह मत केवल अद्वैत की तरह सबको एक ही नहीं मानता और केवल द्वैत की तरह पूर्ण अलगाव भी नहीं रखता। Britannica में भी तीन वास्तविकताओं के रूप में ईश्वर, आत्मा और पदार्थ का उल्लेख है तथा आत्मा और पदार्थ को ईश्वर से व्याप्त बताया गया है। इसी कारण सही पहचान द्वैताद्वैत है: आत्माएँ ब्रह्म से भिन्न भी हैं और अभिन्न भी।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) अद्वैत में मुख्य जोर अद्वैत यानी अभेद पर है, जबकि निम्बार्क के मत में आत्मा और ब्रह्म के बीच भिन्नता और अभिन्नता दोनों मानी जाती हैं।
  • (B) शुद्धाद्वैत निम्बार्क का मत नहीं है; Britannica में निम्बार्क को भेदाभेद से जोड़ा गया है, जबकि शुद्धाद्वैत को अलग वैष्णव वेदांत परंपरा के रूप में बताया गया है।
  • (D) द्वैत केवल भेद पर जोर देता है, जबकि निम्बार्क का द्वैताद्वैत आत्मा, पदार्थ और ब्रह्म के संबंध में भेद के साथ अभेद को भी स्वीकार करता है।

अवधारणा

मध्यकालीन भक्ति और वेदांत परंपराओं में आचार्यों के दर्शन की पहचान RAS के लिए महत्वपूर्ण है। RAS में भक्ति आंदोलन, वैष्णव संप्रदाय और दार्शनिक शब्दावली अक्सर सीधे जोड़े में पूछे जाते हैं।

स्रोत

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