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RAS प्रश्न

किसी बैंक का शुद्ध ब्याज मार्जिन (NIM) का तात्पर्य है:

सही उत्तर: (D) परिसंपत्तियों के प्रतिशत के रूप में अर्जित ब्याज और भुगतान किए गए ब्याज का अंतर।

किसी बैंक का शुद्ध ब्याज मार्जिन (NIM) अर्जित ब्याज और चुकाए गए ब्याज के अंतर को परिसंपत्तियों के प्रतिशत के रूप में मापता है।

  1. (A)

    बैंक का कुल लाभ

  2. (B)

    पूंजी पर्याप्तता अनुपात

  3. (C)

    ऋण से जमा अनुपात

  4. (D)

    परिसंपत्तियों के प्रतिशत के रूप में अर्जित ब्याज और भुगतान किए गए ब्याज का अंतर

व्याख्या

NIM बैंक की ब्याज-आधारित कमाई को समझने का माप है। दिए गए सूत्र के अनुसार NIM = (ब्याज आय - ब्याज व्यय) / औसत अर्जक परिसंपत्तियां। RBI के स्रोत में भी इसे ब्याज आय के ब्याज व्यय से अधिक भाग को परिसंपत्तियों से स्केल करके मापा गया है। इसलिए यह कुल लाभ नहीं, बल्कि यह बताता है कि बैंक अपनी परिसंपत्तियों और धन को ऋण तथा निवेश जैसे कार्यों में लगाकर ब्याज आय कितनी प्रभावी तरह से बना रहा है। बैंक-स्तर पर अधिक NIM को बेहतर माना जाता है, क्योंकि इससे लाभप्रदता बढ़ सकती है। दिए गए संदर्भ के अनुसार भारतीय बैंकों में NIM सामान्यतः 2.5-4% के बीच रहता है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) बैंक का कुल लाभ ब्याज के अलावा अन्य आय और खर्चों से भी प्रभावित हो सकता है, जबकि NIM खास तौर पर ब्याज आय और ब्याज व्यय के अंतर को परिसंपत्तियों से जोड़ता है।
  • (B) पूंजी पर्याप्तता अनुपात पूंजी से जुड़ा अलग माप है; NIM का आधार पूंजी नहीं, बल्कि ब्याज आय, ब्याज व्यय और परिसंपत्तियां हैं।
  • (C) ऋण से जमा अनुपात ऋण और जमा के संबंध को दिखाता है, जबकि NIM ब्याज से कमाई गई शुद्ध मार्जिन को परिसंपत्तियों के अनुपात में मापता है।

अवधारणा

यह प्रश्न बैंकिंग क्षेत्र के लाभप्रदता और दक्षता संकेतकों की समझ जांचता है। RAS में ऐसे माप बार-बार आते हैं, क्योंकि बैंकिंग शब्दों की सटीक परिभाषा से ही आर्थिक विश्लेषण के प्रश्न हल होते हैं।

स्रोत

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