RAS प्रश्न
मुहम्मद बिन तुगलक के दक्कन अभियान का उद्देश्य था:
सही उत्तर: (D) नव विजित दक्षिणी क्षेत्रों में विद्रोह दबाना।
मुहम्मद बिन तुगलक के दक्कन अभियानों का उद्देश्य नव-विजित दक्षिणी क्षेत्रों में उठे विद्रोहों को दबाकर दिल्ली सल्तनत का नियंत्रण बनाए रखना था।
व्याख्या
मुहम्मद बिन तुगलक के समय दक्कन के बड़े हिस्से दिल्ली सल्तनत में मिला लिए गए थे और वहां राजस्व तथा प्रशासनिक व्यवस्था खड़ी की गई थी। दूरी, कठिन भू-भाग और दक्कन के सूबेदारों तथा अमीरों की बड़ी शक्ति के कारण सुल्तान का वास्तविक नियंत्रण कमजोर था। दक्षिण में विद्रोह शुरू हुए तो तुगलक ने उन्हें अमीरों की शक्ति से जोड़ा और उन्हें दबाने की नीति अपनाई। 1327 में सागर, गुलबर्गा का विद्रोह दबाया गया, और इसी पृष्ठभूमि में देवगिरि को 1328 में दूसरी राजधानी दौलताबाद बनाया गया ताकि दक्षिणी प्रांतों पर नजर रखी जा सके। फिर भी पकड़ कमजोर हुई; 1347 में बहमनी सल्तनत और 1336 में विजयनगर साम्राज्य जैसे स्वतंत्र केंद्र उभरे।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) श्रीलंका जीतना लक्ष्य नहीं था, क्योंकि दक्कन और दक्षिणी प्रांत दिल्ली सल्तनत के अधीन आ चुके थे और वहां नियंत्रण बनाए रखना मुख्य उद्देश्य था।
- (B) दक्षिण-पूर्व एशिया से व्यापार स्थापित करना इस नीति का आधार नहीं था; दक्कन में राजस्व, प्रशासन और विद्रोह-दमन की समस्या प्रमुख थी।
- (C) नई राजधानी बनाना अपने-आप में अभियान का लक्ष्य नहीं था; दौलताबाद को दूसरी राजधानी बनाना दक्षिणी प्रांतों को नियंत्रण में रखने की प्रशासनिक कोशिश थी।
अवधारणा
दिल्ली सल्तनत की दक्कन नीति, राजधानी स्थानांतरण और प्रांतीय विद्रोहों का संबंध RAS के लिए महत्वपूर्ण है। तुगलक काल से बहमनी और विजयनगर जैसे नए दक्षिणी शक्ति-केंद्रों के उदय को समझना इसी पृष्ठभूमि पर निर्भर करता है।
