RAS प्रश्न
कालिदास का 'मेघदूत' किस प्रकार की रचना है?
सही उत्तर: (A) गीतिकाव्य (खंडकाव्य)।
कालिदास का मेघदूत गीतिकाव्य, यानी खंडकाव्य, के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
व्याख्या
मेघदूत को गीतिकाव्य या खंडकाव्य माना जाता है, क्योंकि इसका केंद्र किसी बड़े युद्ध, राजवंश या लंबी ऐतिहासिक कथा पर नहीं, बल्कि निर्वासित यक्ष की विरह-भावना और उसके संदेश पर है। इसमें मंदाक्रांता छंद में लगभग 120 श्लोक हैं और मध्य भारत में निर्वासित यक्ष एक गुजरते बादल से अलका, हिमालय में रहने वाली अपनी प्रिय पत्नी तक संदेश पहुंचाने का अनुरोध करता है। NCERT के स्रोत में कालिदास की रचनाओं में कुमारसंभव और रघुवंश को महाकाव्य, अभिज्ञानशाकुंतलम् को नाटक और मेघदूत को अलग से गीतिकाव्य बताया गया है। इसलिए इसका सही वर्गीकरण नाटक या महाकाव्य नहीं, गीतिकाव्य है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) नाटक कहना ठीक नहीं है, क्योंकि अभिज्ञानशाकुंतलम् नाटक है, जबकि मेघदूत गीतिकाव्य है।
- (C) महाकाव्य कहना ठीक नहीं है, क्योंकि कुमारसंभव और रघुवंश महाकाव्य के उदाहरण हैं, जबकि मेघदूत अलग से गीतिकाव्य है।
- (D) ऐतिहासिक इतिहास कहना ठीक नहीं है, क्योंकि मेघदूत का आधार निर्वासित यक्ष का बादल के माध्यम से पत्नी को संदेश भेजना है, कोई इतिहास-वृत्तांत नहीं।
अवधारणा
प्राचीन भारतीय साहित्य में कालिदास की प्रमुख रचनाओं और उनकी विधा-पहचान RAS संस्कृति खंड के लिए बुनियादी तथ्य हैं। महाकाव्य, नाटक और गीतिकाव्य की सही पहचान से साहित्यिक कृतियों का वर्गीकरण स्पष्ट रहता है।
