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RAS प्रश्न

कुषाण काल में मथुरा कला शैली गांधार कला से किस प्रकार भिन्न है?

सही उत्तर: (A) लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग करने वाली स्वदेशी भारतीय शैली।

कुषाण काल की मथुरा कला शैली गांधार कला से इसलिए अलग पहचानी जाती है कि यह लाल धब्बेदार बलुआ पत्थर में बनी स्वदेशी भारतीय शैली थी।

  1. (A)

    लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग करने वाली स्वदेशी भारतीय शैली

  2. (B)

    केवल अमूर्त कला

  3. (C)

    केवल कांस्य मूर्तियाँ

  4. (D)

    संगमरमर का प्रयोग

व्याख्या

मथुरा कला में लाल धब्बेदार बलुआ पत्थर का प्रयोग और भारतीय कलात्मक परंपरा इसकी मुख्य पहचान है। NCERT के अनुसार पहली शताब्दी ईस्वी से मथुरा और गांधार दोनों बुद्ध प्रतिमाओं के बड़े केंद्र बने, पर मथुरा की स्थानीय मूर्तिकला परंपरा इतनी मजबूत हुई कि वह उत्तर भारत में फैली। मथुरा की बुद्ध प्रतिमा पहले की यक्ष प्रतिमाओं की रेखा पर बनी, जबकि गांधार में हेलनिस्टिक और ग्रीको-रोमन लक्षण दिखते हैं। इसी कारण विकल्प A सही है: यह केवल सामग्री का फर्क नहीं, बल्कि शैलीगत फर्क भी है। मथुरा में भारतीय रूप-विधान, योगिक आसन और पारदर्शी वस्त्रों पर जोर है; गांधार में बाहरी प्रभावों वाला रूप-व्यवहार प्रमुख है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (B) मथुरा कला केवल अमूर्त कला नहीं थी, क्योंकि बुद्ध की बैठी हुई प्रतिमा, योगिक आसन, सिर और वस्त्र जैसे स्पष्ट मूर्त रूप मथुरा शैली से जुड़े हैं।
  • (C) केवल कांस्य मूर्तियों का विकल्प गलत है, क्योंकि सही पहचान लाल धब्बेदार बलुआ पत्थर और भारतीय शैली से जुड़ी है; कांस्य इसकी मुख्य सामग्री नहीं है।
  • (D) संगमरमर का प्रयोग मथुरा शैली की पहचान नहीं है; इसकी पहचान लाल धब्बेदार बलुआ पत्थर और भारतीय शैली पर आधारित है।

अवधारणा

प्राचीन भारतीय कला में मथुरा और गांधार शैलियों के तुलनात्मक लक्षण महत्वपूर्ण हैं। RAS में यह बार-बार आता है क्योंकि कला-इतिहास में सामग्री, शैली और बाहरी प्रभावों के आधार पर स्कूलों की पहचान पूछी जाती है।

स्रोत

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