RAS प्रश्न
मेवाड़ के महाराणा फतेह सिंह ने अंग्रेजों द्वारा आयोजित किस दरबार में भाग लेने से मना कर दिया और राजपूत गौरव के प्रतीक बने?
सही उत्तर: (B) दिल्ली दरबार 1903।
मेवाड़ के महाराणा फतेह सिंह ने एडवर्ड सप्तम के राज्याभिषेक के उपलक्ष्य में आयोजित वायसराय कर्जन के 1903 के दिल्ली दरबार में जाने से इनकार कर दिया। उनका यह बहिष्कार राजपूत स्वाभिमान का प्रतीक बना।
व्याख्या
सही उत्तर 1903 का दिल्ली दरबार है। अल्काज़ी कलेक्शन ऑफ़ फ़ोटोग्राफ़ी के प्रकाशन ‘पावर एंड रेज़िस्टेंस: द दिल्ली कोरोनेशन दरबार्स’ में दिल्ली दरबारों को ऐसे समारोह बताया गया है, जिनमें ब्रिटिश शासकों का भारत के सम्राट या सम्राज्ञी के रूप में राज्याभिषेक किया गया: 1877 में विक्टोरिया, 1903 में एडवर्ड सप्तम और 1911 में जॉर्ज पंचम। मेवाड़ के महाराणा फतेह सिंह 1903 में दिल्ली पहुँचे, लेकिन वायसराय कर्जन के दरबार में अधीनस्थ की तरह उपस्थित होने के बजाय रेलवे स्टेशन से ही लौट गए। उनका इनकार राजपूत शासक को ब्रिटिश साम्राज्य का वफ़ादार अधीनस्थ दिखाने की कोशिश का विरोध था। केसरी सिंह बारहठ की कविता ‘चेतावणी रा चूंगटिया’ इस बहिष्कार की प्रेरणा बनी। इन तथ्यों से साफ़ है कि निर्णायक वर्ष 1903 था, कोई दूसरा शाही आयोजन नहीं।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) 1877 का दिल्ली दरबार विक्टोरिया से जुड़ा था, जबकि महाराणा फतेह सिंह लौट गए थे और उन्होंने एडवर्ड सप्तम के लिए आयोजित 1903 के दिल्ली दरबार में जाने से इनकार कर दिया था।
- (C) 1906 का शिमला सम्मेलन इस प्रसंग से जुड़ा कोई दरबार नहीं था। महाराणा फतेह सिंह ने 1903 में वायसराय कर्जन के दिल्ली दरबार में जाने से इनकार किया था।
- (D) राज्याभिषेक दरबार 1877, 1903 और 1911 में दिल्ली में हुए थे। महाराणा फतेह सिंह ने 1903 के दिल्ली दरबार में जाने से इनकार किया था, 1912 के कलकत्ता दरबार में नहीं।
अवधारणा
यह प्रश्न राजस्थान के इतिहास में ब्रिटिश शाही समारोहों के प्रति रियासतों के रुख को परखता है। दरबार में जाना अधीनता का संकेत माना जा सकता था, जबकि उसमें जाने से इनकार राजनीतिक विरोध बन सकता था। RAS में यह प्रसंग बार-बार पूछा जाता है क्योंकि इसमें मेवाड़, राजपूत स्वाभिमान, केसरी सिंह बारहठ और दिल्ली दरबार एक साथ आते हैं।
