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RAS प्रश्न

मध्वाचार्य (13वीं शताब्दी) ने प्रतिपादित किया:

सही उत्तर: (A) द्वैत (द्वैतवाद) — ईश्वर और आत्मा शाश्वत रूप से अलग हैं।

मध्वाचार्य ने द्वैत दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसमें ईश्वर और व्यक्तिगत आत्माएँ मूल रूप से अलग मानी जाती हैं।

  1. (A)

    द्वैत (द्वैतवाद) — ईश्वर और आत्मा शाश्वत रूप से अलग हैं

  2. (B)

    विशिष्टाद्वैत

  3. (C)

    बौद्ध धर्म

  4. (D)

    अद्वैत

व्याख्या

मध्वाचार्य, जिन्हें आनन्दतीर्थ या पूर्णप्रज्ञ भी कहा गया, उडुपी, कर्नाटक से जुड़े दार्शनिक थे और द्वैत के प्रमुख प्रतिपादक माने जाते हैं। इस दर्शन में ईश्वर, आत्मा और पदार्थ को शाश्वत रूप से भिन्न माना गया है; इसलिए यह अद्वैत की उस धारणा से अलग खड़ा होता है जिसमें जीव, आत्मा और ब्रह्म की मौलिक एकता पर जोर है। मध्वाचार्य ने शंकराचार्य के अद्वैत का विरोध किया और पाँच मूलभूत भेद बताए: ईश्वर-आत्मा, ईश्वर-पदार्थ, आत्मा-आत्मा, आत्मा-पदार्थ और पदार्थ-पदार्थ। इसलिए मध्वाचार्य की सही दार्शनिक पहचान द्वैत दर्शन ही है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (B) विशिष्टाद्वैत मध्वाचार्य से संबद्ध नहीं है, क्योंकि मध्वाचार्य द्वैत से जुड़े हैं, जबकि वेदान्त की मुख्य धाराओं में विशिष्टाद्वैत रामानुज से संबद्ध बताया गया है।
  • (C) बौद्ध धर्म मध्वाचार्य के वेदान्त-दर्शन से मेल नहीं खाता, क्योंकि मध्वाचार्य द्वैत दर्शन के प्रतिपादक माने जाते हैं।
  • (D) अद्वैत मध्वाचार्य के मत से अलग है, क्योंकि एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका के अनुसार मध्वाचार्य ने शंकराचार्य के अद्वैत का प्रतिवाद करते हुए ईश्वर और जीव के मूलभूत भेद पर जोर दिया।

अवधारणा

भक्ति-आंदोलन और वेदान्त दर्शन की प्रमुख धाराओं में आचार्य-दर्शन मिलान एक महत्वपूर्ण तथ्यात्मक क्षेत्र है। RAS में ऐसे तथ्य बार-बार पूछे जाते हैं क्योंकि एक ही नाम, मत और काल को मिलाकर तथ्यात्मक भ्रम बनाया जाता है।

स्रोत

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