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RAS प्रश्न

राजस्थान की कठपुतली कला किस प्रकार की कठपुतलियों का उपयोग करती है?

सही उत्तर: (C) लकड़ी और कपड़े से बनी धागे वाली कठपुतलियाँ (मैरियोनेट)।

राजस्थान की कठपुतली कला में लकड़ी और कपड़े से बनी धागे वाली कठपुतलियों का उपयोग होता है।

  1. (A)

    छड़ वाली कठपुतली

  2. (B)

    चमड़े की छाया कठपुतली

  3. (C)

    लकड़ी और कपड़े से बनी धागे वाली कठपुतलियाँ (मैरियोनेट)

  4. (D)

    दस्ताने वाली कठपुतली

व्याख्या

राजस्थानी कठपुतली की मूल पहचान यही है कि यह धागे से चलाई जाने वाली कठपुतली है, जिसे ऊपर से नियंत्रित किया जाता है। राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय के अनुसार राजस्थान में स्थानीय रूप से कठपुतली कही जाने वाली यह कला धागे वाली कठपुतली पर आधारित है। इसमें चेहरे और शरीर लकड़ी के होते हैं, और पहनावा घाघरा-चोली जैसे कपड़े का होता है। इसका सिर आम की लकड़ी का होता है, शरीर कपड़े का होता है और पैर नहीं होते, केवल बहता घाघरा होता है। नट/भाट समुदाय राजपूत वीरों, प्रेम कथाओं और सामाजिक विषयों पर ऐसे प्रदर्शन करता है। इसलिए सही प्रकार डंडा, छाया या दस्ताना नहीं, बल्कि धागे वाली कठपुतली है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) डंडा कठपुतली राजस्थान की कठपुतली की पहचान नहीं है; यह बंगाल के पुतुल नाच और ओडिशा से जुड़ी परंपरा है।
  • (B) छाया कठपुतली चमड़े की परछाईं से जुड़ी शैली है, जबकि राजस्थान की कठपुतली लकड़ी-कपड़े की धागे वाली कठपुतली है; छाया कठपुतली कर्नाटक और आंध्र से जोड़ी जाती है।
  • (D) दस्ताना कठपुतली हाथ में पहनकर चलाई जाती है, जबकि राजस्थानी कठपुतली ऊपर से धागों द्वारा नियंत्रित होती है; दस्ताना कठपुतली केरल के पावाकूथु से संबंधित है।

अवधारणा

राजस्थान की लोक कलाओं में कठपुतली परंपरा की मूल तकनीक धागे से संचालन है। RAS में ऐसे प्रश्न इसलिए बार-बार आते हैं क्योंकि कला-रूप, समुदाय और क्षेत्रीय पहचान को सीधे जोड़कर पूछा जाता है।

स्रोत

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