RAS प्रश्न
कालीबंगन की खोज 1952 में किस पुरातत्वविद ने सबसे पहले की?
सही उत्तर: (A) अमलानंद घोष।
कालीबंगन को 1952 में अमलानंद घोष ने घग्गर के सूखे नदी-क्षेत्र में अपने पुरातात्विक अन्वेषण के दौरान सबसे पहले पहचाना था।
व्याख्या
कालीबंगन की 1952 की पहली पहचान का श्रेय अमलानंद घोष को जाता है। उनके पुरातात्विक अन्वेषण में यह स्थल पहली बार प्रमुख रूप से सामने आया। यह स्थल घग्गर, यानी प्राचीन सरस्वती, के किनारे हनुमानगढ़ जिले के पीलीबंगा क्षेत्र से जुड़ा है। घोष ने सूखी नदी-घाटियों के सर्वेक्षण में ऐसे कई टीले पहचाने जिन पर हड़प्पा संस्कृति के प्रमाण मिले, और उनमें कालीबंगन अपने दो टीलों के कारण विशेष महत्व का लगा। बाद में 1961 से 1969 तक बी.बी. लाल और बी.के. थापर ने बड़े पैमाने पर उत्खनन कराया, जिससे पूर्व-हड़प्पा और हड़प्पा चरण स्पष्ट हुए। इसलिए खोज और उत्खनन को अलग-अलग समझना जरूरी है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) बी.बी. लाल कालीबंगन के 1961 से 1969 के बाद के उत्खनन से जुड़े थे, इसलिए 1952 की पहली पहचान का श्रेय उन्हें नहीं जाता।
- (C) आर.डी. बनर्जी का संबंध मोहनजोदड़ो की खोज से था, कालीबंगन की 1952 की पहचान से नहीं।
- (D) दयाराम साहनी हड़प्पा के उत्खनन से जुड़े थे, जबकि कालीबंगन को 1952 में अमलानंद घोष ने पहचाना था।
अवधारणा
राजस्थान के पुरातात्विक स्थलों, खासकर सिंधु-सरस्वती परंपरा से जुड़े कालीबंगन, में खोजकर्ता और उत्खननकर्ता का फर्क महत्वपूर्ण है। RAS में यह तथ्य बार-बार आता है क्योंकि राजस्थान इतिहास में स्थल, नदी-क्षेत्र और पुरातत्वविद को साथ जोड़कर पूछा जाता है।
