RAS प्रश्न
जैन धर्म के पाँच महाव्रतों में निम्नलिखित सभी शामिल हैं, सिवाय:
सही उत्तर: (A) वैदिक देवताओं की पूजा।
जैन धर्म के पाँच महाव्रतों में वैदिक देवताओं की पूजा शामिल नहीं है; इनमें अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह आते हैं।
व्याख्या
जैन धर्म के पाँच महाव्रत आचरण को नियंत्रित करने वाले मूल व्रत हैं: अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह। Britannica में भी महाव्रतों को पाँच महाव्रत बताया गया है और उनमें हिंसा न करना, झूठ और चोरी से बचना, ब्रह्मचर्य तथा सभी संपत्तियों के त्याग को रखा गया है। इसलिए वैदिक देवताओं की पूजा इस सूची का हिस्सा नहीं हो सकती। महाव्रत जीवनभर के लिए मुख्यतः संन्यासियों द्वारा लिए जाते हैं, जबकि गृहस्थ इनके तुलनात्मक रूप से हल्के रूप, यानी अणुव्रत, का पालन करते हैं। इसी कारण प्रश्न में “सिवाय” पूछा गया है और सही अपवाद विकल्प A है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) अपरिग्रह महाव्रतों में आता है, क्योंकि यह अनासक्ति और संग्रह या स्वामित्व-भाव से दूर रहने का व्रत है।
- (C) सत्य महाव्रतों का अंग है, क्योंकि जैन आचरण में झूठ से बचना मूल व्रतों में गिना गया है।
- (D) अहिंसा महाव्रतों में शामिल है और इसे सर्वोच्च व्रत बताया गया है।
अवधारणा
यह प्रश्न प्राचीन भारत में श्रमण परंपराओं, खासकर जैन धर्म के नैतिक सिद्धांतों की समझ जांचता है। RAS में यह विषय बार-बार आता है, क्योंकि बौद्ध-जैन धर्म, वैदिक परंपरा और उनके आचार-सिद्धांतों के अंतर से सीधे तथ्यात्मक प्रश्न बनते हैं।
