RAS प्रश्न
मुद्रास्फीति-सूचकांकित बॉन्ड निवेशकों को किससे बचाते हैं:
सही उत्तर: (D) मुद्रास्फीति के कारण वास्तविक रिटर्न में कमी।
मुद्रास्फीति-सूचकांकित बॉन्ड निवेशकों को मुद्रास्फीति के कारण वास्तविक रिटर्न घटने से बचाते हैं।
व्याख्या
मुद्रास्फीति-सूचकांकित बॉन्ड का मूल उद्देश्य निवेशक की कमाई को सिर्फ नाममात्र ब्याज तक सीमित न रखना है। जब कीमतें बढ़ती हैं, तो समान राशि की खरीद-शक्ति घटती है; इसी को वास्तविक रिटर्न का क्षरण कहा जाता है। RBI के अनुसार ऐसे बॉन्ड मुद्रास्फीति से वास्तविक रिटर्न के क्षरण से सुरक्षा देते हैं, और मुद्रास्फीति को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक या थोक मूल्य सूचकांक जैसे सूचकांकों से मापा जा सकता है। इसलिए इन बॉन्ड में रिटर्न मुद्रास्फीति के अनुसार समायोजित माना जाता है। भारत में ऐसे बॉन्ड 2013/2014 में जारी किए गए थे। इसीलिए सही विकल्प D है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) शेयर बाजार दुर्घटना से बचाव इस साधन का लक्ष्य नहीं है, क्योंकि मुद्रास्फीति-सूचकांकित बॉन्ड को RBI मुद्रास्फीति से वास्तविक रिटर्न की सुरक्षा से जोड़ता है।
- (B) मुद्रा अवमूल्यन अलग जोखिम है; इस बॉन्ड की संरचना खास तौर पर मुद्रास्फीति सूचकांक से जुड़कर वास्तविक रिटर्न के क्षरण को संभालती है।
- (C) चूक जोखिम इस साधन का मुख्य उद्देश्य नहीं है; सरकारी बॉन्ड को यहां चूक जोखिम से बचाव नहीं, बल्कि मुद्रास्फीति-समायोजित रिटर्न से जोड़ा गया है।
अवधारणा
भारतीय अर्थव्यवस्था में सरकारी प्रतिभूतियों और मुद्रास्फीति से जुड़े वित्तीय साधनों की समझ जरूरी है। RAS में यह इसलिए बार-बार आता है क्योंकि मुद्रास्फीति, वास्तविक रिटर्न और RBI की वित्तीय-बाजार भूमिका आपस में जुड़े हुए स्थायी विषय हैं।
