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RAS प्रश्न

पारंपरिक राजस्थानी लघु चित्रकला में 'परदाज़' तकनीक का अर्थ है:

सही उत्तर: (B) चेहरों और वस्त्रों पर अंतिम छायांकन और विस्तृत काम।

राजस्थानी लघु चित्रकला में परदाज़ चेहरों और वस्त्रों पर अंतिम छायांकन, बारीक रेखाओं, सिलवटों और भावों का सूक्ष्म काम है।

  1. (A)

    वसली (कागज़) की सतह को चमकाकर तैयार करना

  2. (B)

    चेहरों और वस्त्रों पर अंतिम छायांकन और विस्तृत काम

  3. (C)

    प्राकृतिक रंगद्रव्यों को अरबी गोंद के साथ मिलाना

  4. (D)

    किनारों पर सोने की पत्ती लगाना

व्याख्या

परदाज़ का मतलब चित्र पूरा होने से पहले किया जाने वाला वह बारीक अंतिम काम है जिसमें चेहरे, वस्त्र और अभिव्यक्ति को जीवन मिलता है। रंग भरने और रूपरेखा के बाद बारीक विवरण तथा छायांकन अलग चरण के रूप में आते हैं; चेहरे, हाथ और पैर अंतिम चरणों में बनाए जाते हैं, क्योंकि दर्शक की नजर सबसे पहले आकृतियों पर जाती है और गलती तुरंत दिखती है। चेहरा सबसे अंत में बनाया जाता है, उसे मूल रंग से नहीं बल्कि छायांकन से रंग दिया जाता है, और भौंह, पलक तथा लटों जैसे सूक्ष्म विवरण पकड़े जाते हैं। यही कारण है कि परदाज़ को सबसे कुशल काम माना जाता है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) वसली या कागज़ की सतह तैयार करना चित्र शुरू होने से पहले का आधार-तैयारी चरण है, जबकि परदाज़ तैयार चित्र पर अंतिम छायांकन और बारीक विवरण से जुड़ा है।
  • (C) रंग मिलाना सामग्री-तैयारी का काम है; परदाज़ में रंगद्रव्य तैयार नहीं किए जाते, बल्कि बने हुए रूपों पर सूक्ष्म रेखाएँ, छायांकन और अभिव्यक्ति जोड़ी जाती है।
  • (D) सोने की पत्ती या वर्क का प्रयोग अलंकरण से जुड़ा है; परदाज़ का केंद्र चेहरों, वस्त्रों और भावों की अंतिम बारीक चित्रकारी है।

अवधारणा

यह प्रश्न राजस्थानी लघु चित्रकला की कार्य-प्रक्रिया और पारिभाषिक शब्दावली को परखता है। आरएएस में कला-संस्कृति के प्रश्न अक्सर शैली पहचान से आगे बढ़कर तकनीक, सामग्री और निर्माण-क्रम पर आते हैं।

स्रोत

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