RAS प्रश्न
विशाखा बनाम राजस्थान राज्य (1997) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने किस विषय पर दिशानिर्देश दिए थे?
सही उत्तर: (C) कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम।
विशाखा बनाम राजस्थान राज्य (1997) में सर्वोच्च न्यायालय ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए दिशानिर्देश तय किए थे।
व्याख्या
विशाखा मामले में कामकाजी महिलाओं के मौलिक अधिकारों की रक्षा का मुद्दा उठा, क्योंकि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकने के लिए घरेलू कानून में स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी। यौन उत्पीड़न से अनुच्छेद 14, 19 और 21 के अधिकार प्रभावित होते हैं, इसलिए विधायी खालीपन भरने के लिए दिशानिर्देश जरूरी थे। न्यायालय ने नियोक्ताओं और संस्थानों पर रोकथाम, शिकायत-निवारण और आवश्यक कदम उठाने की जिम्मेदारी रखी। यही विशाखा दिशानिर्देश 2013 में इस विषय पर अधिनियम बनने तक प्रभावी रहे। इसलिए सही विषय कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम है, न कि पर्यावरण, निजता या दहेज मृत्यु।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) पर्यावरण संरक्षण विशाखा निर्णय का विषय नहीं था; यह मामला कामकाजी महिलाओं के कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से जुड़े अधिकारों और सुरक्षा उपायों से संबंधित था।
- (B) निजता का अधिकार के. एस. पुट्टस्वामी मामले से जुड़ा है, जबकि विशाखा मामला कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम से जुड़ा था।
- (D) दहेज मृत्यु की रोकथाम इस निर्णय का मुद्दा नहीं था; सर्वोच्च न्यायालय ने नियोक्ताओं और संस्थानों के लिए यौन उत्पीड़न रोकने के कार्यस्थल संबंधी मानदंड तय किए।
अवधारणा
विशाखा मामला संवैधानिक उपचार, मौलिक अधिकारों और न्यायालय द्वारा विधायी खालीपन में दिशानिर्देश देने की भूमिका से जुड़ा है। आरएएस में ऐसे मामले बार-बार आते हैं क्योंकि वे शासन, लैंगिक न्याय और न्यायिक सक्रियता को एक साथ जोड़ते हैं।
