RAS प्रश्न
वैदिक काल में 'गोत्र' शब्द का अर्थ है:
सही उत्तर: (C) एक कुल या वंश समूह।
वैदिक काल में गोत्र का आशय ऐसे कुल या वंश समूह से था जिसे किसी सामान्य पूर्वज, सामान्यतः वैदिक ऋषि, से जोड़ा जाता था।
व्याख्या
गोत्र का मूल अर्थ गोशाला से जुड़ा था, लेकिन वैदिक और बाद की सामाजिक व्यवस्था में इसका अर्थ बदलकर कुल या वंश समूह हो गया। NCERT के अनुसार लगभग 1000 ईसा पूर्व से लोगों, विशेषकर ब्राह्मणों, को गोत्रों के आधार पर वर्गीकृत किया जाने लगा। हर गोत्र किसी वैदिक ऋषि के नाम पर माना जाता था और उसी गोत्र के लोगों को उस ऋषि का वंशज समझा जाता था। इसलिए गोत्र केवल गायों के स्थान का शब्द नहीं रहा; यह सामाजिक पहचान और विवाह-नियम से जुड़ गया। इसी कारण समान गोत्र के सदस्यों में विवाह निषिद्ध माना गया और विवाह के बाद स्त्री से पति का गोत्र अपनाने की अपेक्षा की गई।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) यज्ञ के लिए वैदिक परंपरा में यज्ञ या हवन जैसे शब्द प्रयुक्त होते हैं; गोत्र का प्रयोग NCERT के अनुसार वंश-आधारित पहचान के लिए किया गया है।
- (B) गोत्र का मूल अर्थ गायों के स्थान से जुड़ सकता है, लेकिन वैदिक सामाजिक प्रयोग में यह सामान्य पूर्वज से जुड़े कुल या वंश समूह का सूचक बन गया।
- (D) जनजातीय सभाओं के लिए सभा और समिति जैसे शब्द मिलते हैं; गोत्र ऐसी सभा नहीं, बल्कि वैदिक ऋषि से जोड़े गए वंश समूह की पहचान था।
अवधारणा
वैदिक समाज में गोत्र कुल, वंश और विवाह-नियमों से जुड़ी सामाजिक पहचान था। RAS में यह विषय बार-बार आता है क्योंकि प्राचीन भारतीय समाज को समझने के लिए गोत्र, पितृवंश और बहिर्विवाह जैसे शब्द मूल आधार बनते हैं।
