RAS प्रश्न
एस.आर. बोम्मई मामले (1994) में, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि:
सही उत्तर: (D) अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाना न्यायिक समीक्षा के अधीन है।
एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994) में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाना न्यायिक समीक्षा के अधीन है।
व्याख्या
इस मामले में 9 न्यायाधीशों की पीठ ने अनुच्छेद 356 पर राष्ट्रपति की शक्ति को अदालत से परे नहीं माना। सर्वोच्च न्यायालय रिपोर्ट्स की शीर्ष टिप्पणी में साफ है कि अनुच्छेद 356 के तहत घोषणा न्यायिक समीक्षा योग्य है; अदालत राष्ट्रपति की निजी संतुष्टि पर नहीं, बल्कि उस सामग्री पर देख सकती है जिसके आधार पर संतुष्टि बनी। इसी निर्णय में धर्मनिरपेक्षता को संविधान की मूल संरचना का हिस्सा माना गया। विधानसभा के मामले में भी सिद्धांत यही है कि संसद की मंजूरी तक विधानसभा को भंग करने के बजाय निलंबित रखा जाना चाहिए, ताकि असंवैधानिक या दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई पर अदालत प्रभावी राहत दे सके। इसलिए सही बात यह है कि राष्ट्रपति शासन लगाना न्यायिक समीक्षा के अधीन है।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) यह विकल्प गलत है, क्योंकि बोम्मई निर्णय में संसद की मंजूरी से पहले विधानसभा को भंग करने के बजाय निलंबित रखने का सिद्धांत बताया गया।
- (B) यह विकल्प गलत है, क्योंकि बोम्मई मामला वित्तीय आपातकाल पर नहीं, अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन और उसकी न्यायिक समीक्षा पर था।
- (C) यह विकल्प निर्णय के उलट है, क्योंकि अदालत ने अनुच्छेद 356 की घोषणा को न्यायिक समीक्षा के अधीन माना।
अवधारणा
यह प्रश्न संघीय ढांचे, अनुच्छेद 356 और न्यायिक समीक्षा की सीमा को जांचता है। RAS में यह बार-बार आता है क्योंकि राष्ट्रपति शासन, मूल संरचना और केंद्र-राज्य संबंध भारतीय राजव्यवस्था के स्थायी परीक्षा-बिंदु हैं।
