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RAS प्रश्न

नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत संघ (2018) मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने:

सही उत्तर: (C) धारा 377 IPC की व्याख्या सीमित करते हुए सहमति से किए गए समलैंगिक कृत्यों को अपराधमुक्त किया।

नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत संघ (2018) में सर्वोच्च न्यायालय ने धारा 377 IPC को सीमित अर्थ में पढ़कर वयस्कों के बीच निजी तौर पर सहमति से होने वाले समलैंगिक यौन कृत्यों को अपराधमुक्त किया।

  1. (A)

    समलैंगिक विवाह को वैध किया

  2. (B)

    धारा 377 IPC को बरकरार रखा

  3. (C)

    धारा 377 IPC की व्याख्या सीमित करते हुए सहमति से किए गए समलैंगिक कृत्यों को अपराधमुक्त किया

  4. (D)

    IPC की पूरी धारा 377 को रद्द किया

व्याख्या

इस निर्णय में 5-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने माना कि धारा 377 IPC, जहां वह 18 वर्ष से अधिक आयु के वयस्कों के निजी और स्वैच्छिक सहमति वाले यौन संबंधों को अपराध बनाती है, वहां संविधान से टकराती है। न्यायालय ने साफ किया कि ऐसी सहमति स्वतंत्र होनी चाहिए, दबाव या जबरदस्ती से मुक्त। इसलिए धारा 377 को पूरी तरह हटाया नहीं गया; उसे इतना सीमित किया गया कि वह सहमति वाले वयस्क संबंधों पर लागू न हो। निर्णय ने इस हिस्से को अनुच्छेद 14, 15, 19 और 21 के विरुद्ध माना, क्योंकि समानता, भेदभाव-निषेध, अभिव्यक्ति, गरिमा, निजता और व्यक्तिगत स्वायत्तता पर अनावश्यक चोट थी।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) निर्णय का मुद्दा समलैंगिक विवाह की वैधता नहीं था; न्यायालय ने धारा 377 IPC के तहत सहमति वाले वयस्क निजी कृत्यों की आपराधिकता पर ही निर्णय दिया।
  • (B) धारा 377 IPC को ज्यों का त्यों बरकरार नहीं रखा गया, क्योंकि न्यायालय ने सहमति वाले वयस्क निजी संबंधों पर इसके लागू होने को असंवैधानिक घोषित किया।
  • (D) पूरी धारा 377 IPC रद्द नहीं हुई; निर्णय ने गैर-सहमति वाले कृत्यों, नाबालिगों के विरुद्ध कृत्यों और पशुओं से यौन कृत्यों पर धारा 377 का लागू रहना स्पष्ट किया।

अवधारणा

यह प्रश्न मौलिक अधिकारों पर न्यायिक समीक्षा की समझ जांचता है, खासकर जब कोई दंड कानून अनुच्छेद 14, 15, 19 और 21 से टकराता है। RAS में ऐसे निर्णय इसलिए उपयोगी होते हैं क्योंकि वे संविधान के अनुच्छेदों को जीवन, गरिमा और समानता के ठोस मामलों से जोड़ते हैं।

स्रोत

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