RAS प्रश्न
उत्तर वैदिक काल में 'सभा' किस रूप में विकसित हुई?
सही उत्तर: (C) बुजुर्गों और अभिजात वर्ग की परिषद।
उत्तर वैदिक काल में सभा सामान्य जनसभा से बदलकर वरिष्ठों और कुलीनों की विशिष्ट परिषद बन गई।
व्याख्या
सभा और समिति वैदिक परंपरा में लोगों के जुटान, सभा या परिषद से जुड़े शब्द थे। उत्तर वैदिक काल में सभा का स्वरूप पहले जैसा खुला नहीं रहा। इस दौर में सभा सामान्य सभा न रहकर वरिष्ठों और कुलीनों की विशिष्ट परिषद बन गई। इसी के साथ समिति ने भी अपना लोकतांत्रिक चरित्र खोया। इसलिए C सही है: उत्तर वैदिक काल की सभा अधिक सीमित और अभिजात स्वरूप वाली हो गई थी। राजा की शक्ति बढ़ने और राजसूय-अश्वमेध जैसे बड़े अनुष्ठानों के महत्त्व से भी यही राजनीतिक बदलाव दिखता है कि निर्णय-व्यवस्था व्यापक भागीदारी से हटकर शासक और उच्च वर्ग के करीब गई।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) सभा को केवल धार्मिक निकाय कहना गलत है, क्योंकि वैदिक संदर्भ में सभा और समिति लोगों के जुटान, सभा या परिषद के अर्थ में आते हैं, सिर्फ पूजा-अनुष्ठान तक सीमित नहीं हैं।
- (B) सभी की लोकतांत्रिक सभा वाला विकल्प उलटा है, क्योंकि उत्तर वैदिक काल में सभा अधिक विशिष्ट और कुलीनों तक सीमित परिषद बनी तथा समिति ने भी अपना लोकतांत्रिक चरित्र खोया।
- (D) सैन्य परिषद कहना आधारहीन है, क्योंकि उत्तर वैदिक काल में सभा वरिष्ठों और कुलीनों की परिषद बनी, किसी सैनिक निकाय में नहीं बदली।
अवधारणा
प्राचीन भारतीय राजनीतिक संस्थाओं में सभा, समिति और राजसत्ता के संबंध समय के साथ बदले। RAS में यह विषय बार-बार आता है, क्योंकि इससे वैदिक समाज में जनभागीदारी से अभिजात-प्रधान राजनीति की ओर बदलाव समझ आता है।
