RAS प्रश्न
के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ (2017) मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि:
सही उत्तर: (A) निजता का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है।
के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ (2017) में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि निजता का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मूल अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।
व्याख्या
इस मामले में 9-न्यायाधीशों की पीठ ने सर्वसम्मति से निजता को मूल अधिकार माना। न्यायालय ने साफ किया कि निजता मुख्य रूप से संविधान के अनुच्छेद 21 में जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी से निकलती है, और उसके तत्व भाग 3 के अन्य मूल अधिकारों, यानी अनुच्छेद 14 और 19 से भी जुड़े हो सकते हैं। इसलिए सही उत्तर A है। इसी फैसले ने एम.पी. शर्मा को उस सीमा तक पलट दिया जहां वह निजता को संविधान-संरक्षित अधिकार नहीं मानता था, और खड़क सिंह को भी उस सीमा तक पलटा जहां उसने निजता को भारतीय संविधान के तहत संरक्षित अधिकार नहीं माना था।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) यह विकल्प गलत है क्योंकि निजता को मूल अधिकार मानने का अर्थ यह नहीं है कि उस पर कोई प्रतिबंध कभी नहीं लग सकता; प्रतिबंध के लिए न्यायसंगत, निष्पक्ष और उचित प्रक्रिया चाहिए।
- (C) यह विकल्प गलत है क्योंकि 2017 के पुट्टास्वामी फैसले का निर्णायक मुद्दा निजता का मूल अधिकार था; आधार को असंवैधानिक घोषित करना इस प्रश्न का निष्कर्ष नहीं था।
- (D) यह विकल्प गलत है क्योंकि न्यायालय ने निजता को केवल वैधानिक अधिकार नहीं, बल्कि संविधान के भाग 3 में संरक्षित मूल अधिकार माना।
अवधारणा
यह प्रश्न मूल अधिकारों, खासकर अनुच्छेद 21 और न्यायिक व्याख्या से विकसित अधिकारों की समझ जांचता है। RAS में ऐसे फैसले बार-बार आते हैं क्योंकि वे संविधान के पाठ, न्यायालय की व्याख्या और नागरिक स्वतंत्रता को एक साथ जोड़ते हैं।
