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RAS प्रश्न

जागीरदारी प्रणाली में 'तनख्वाह जागीर' की क्या विशेषता थी?

सही उत्तर: (D) वेतन के बदले सम्राट की इच्छा पर हस्तांतरणीय जागीर।

तनख्वाह जागीर मनसबदारों को वेतन के बदले दिया गया ऐसा राजस्व आवंटन था, जिसे सम्राट अपनी इच्छा से स्थानांतरित या फिर से आवंटित कर सकता था।

  1. (A)

    सीमावर्ती क्षेत्रों में जागीर

  2. (B)

    धार्मिक संस्थाओं को दी गई जागीर

  3. (C)

    वंशानुगत जागीर जो पुत्रों को मिलती थी

  4. (D)

    वेतन के बदले सम्राट की इच्छा पर हस्तांतरणीय जागीर

व्याख्या

तनख्वाह जागीर की प्रकृति उसके नाम से ही स्पष्ट होती है: यह मनसबदारों को नकद वेतन के बदले दी जाने वाली राजस्व-आधारित जागीर थी। इसका मतलब यह नहीं था कि मनसबदार उस क्षेत्र का स्थायी मालिक बन गया; उसे वहां से आय लेने का अधिकार सेवा और वेतन-व्यवस्था से जुड़ा था। इसलिए सम्राट जरूरत पड़ने पर इसे स्थानांतरित कर सकता था या किसी और को फिर से दे सकता था। यही बात इसे वतन जागीर से अलग करती है, क्योंकि वतन जागीर कुछ हद तक पैतृक और स्थानीय आधार वाली मानी जाती थी। NCERT के मुगल कृषि-राजस्व संदर्भ में राज्य की आय का आधार कृषि उत्पादन और उससे जुड़ा कर बताया गया है; तनख्वाह जागीर उसी राजस्व-आधारित प्रशासनिक ढांचे से जुड़ी श्रेणी थी।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) सीमावर्ती क्षेत्र होना तनख्वाह जागीर की पहचान नहीं है; इसकी विशेषता वेतन के बदले राजस्व आवंटन और सम्राट द्वारा स्थानांतरणीयता है।
  • (B) धार्मिक संस्थाओं को दी गई जागीर तनख्वाह जागीर नहीं मानी जाती; यह सुयुर्घाल या इनाम जैसी श्रेणी से जुड़ती है, जबकि तनख्वाह जागीर मनसबदारों की सेवा-वेतन व्यवस्था से जुड़ी थी।
  • (C) पुत्रों को मिलने वाली वंशानुगत जागीर वतन जागीर की विशेषता है; तनख्वाह जागीर पैतृक अधिकार नहीं, बल्कि सेवा के बदले मिला स्थानांतरणीय राजस्व आवंटन थी।

अवधारणा

मुगल जागीरदारी और मनसबदारी व्यवस्था में राजस्व आवंटन की प्रकृति अहम थी। RAS में यह इसलिए बार-बार आता है क्योंकि तनख्वाह, वतन, इनाम और सुयुर्घाल जैसी श्रेणियों का फर्क सीधे प्रशासनिक ढांचे और राजस्व नियंत्रण से जुड़ता है।

स्रोत

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