RAS प्रश्न
राजपूत उत्पत्ति की अग्निकुण्ड कथा और दाशराज प्रसंग, दोनों में किस ऋषि का नाम अलग-अलग भूमिकाओं से जुड़ता है?
सही उत्तर: (A) ऋषि वशिष्ठ।
राजपूत उत्पत्ति की अग्निकुण्ड कथा में और दाशराज प्रसंग में अलग-अलग भूमिकाओं से जुड़ने वाले ऋषि वशिष्ठ हैं।
व्याख्या
ऋषि वशिष्ठ इसलिए सही हैं क्योंकि दोनों संकेत उनके नाम पर मिलते हैं, लेकिन भूमिका अलग है। अग्निकुण्ड परंपरा में आबू पर्वत के हवन-कुण्ड से चार राजपूत योद्धाओं की उत्पत्ति वशिष्ठ के तप या कर्म से जोड़ी जाती है; इसलिए वे राजपूत उत्पत्ति-कथा के ऋषि-पात्र हैं। दाशराज प्रसंग में वही वशिष्ठ राजा सुदास के पक्ष से जुड़े मिलते हैं, जबकि विश्वामित्र विरोधी जन-समूह या संगठन के साथ रखे गए हैं। इसी दोहरी उपस्थिति के कारण उत्तर वशिष्ठ बनता है। गौतम रहुगण का संकेत विदेह माधव के पुरोहित के रूप में अलग प्रसंग से है और चन्दबरदाई अग्निकुण्ड मत के प्रतिपादक के रूप में आते हैं, ऋषि-पात्र के रूप में नहीं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) विश्वामित्र दाशराज प्रसंग में विरोधी संगठन से जुड़े हैं, इसलिए वे सुदास के पक्ष और अग्निकुण्ड कथा दोनों के साझा संकेत को पूरा नहीं करते।
- (C) गौतम रहुगण का संबंध विदेह माधव के पुरोहित के रूप में पूर्वगमन के अलग प्रसंग से बताया गया है, अग्निकुण्ड कथा या सुदास-पक्ष से नहीं।
- (D) चन्दबरदाई अग्निकुण्ड मत को पृथ्वीराज रासो में प्रस्तुत करने वाले कवि के रूप में आते हैं, स्वयं उस कथा के ऋषि-पात्र नहीं हैं।
अवधारणा
यह प्रश्न राजपूत उत्पत्ति के सिद्धांतों और वैदिक प्रसंगों में व्यक्तियों की भूमिका-पहचान को परखता है। RAS में ऐसे प्रश्न बार-बार आते हैं क्योंकि नाम समान दिखते हैं, पर स्रोत में उनकी भूमिका अलग होती है।
