RAS प्रश्न
राजस्थान के हिन्दी साहित्यिक इतिहास में जनार्दन राय नागर की पहचान सबसे ठीक किस कथन से होती है?
सही उत्तर: (A) गद्य गीत से जुड़े लेखक, जिन्हें स्वाधीनता-पूर्व उपन्यासकारों में भी गिना गया।
राजस्थान के हिन्दी साहित्यिक इतिहास में जनार्दन राय नागर की पहचान गद्य गीत से जुड़े लेखक और स्वाधीनता-पूर्व उपन्यासकार, दोनों रूपों में होती है।
व्याख्या
जनार्दन राय नागर राजस्थान के हिन्दी गद्य की दो धाराओं से जुड़े हैं। पृष्ठ 147 पर गद्य गीत के प्रसंग में उनका नाम दिनेशानन्दिनी डालमिया के साथ आता है। पृष्ठ 144 पर वे स्वाधीनता से पहले के महत्त्वपूर्ण उपन्यासकारों में भी शामिल हैं और जगद्गुरु शंकराचार्य जैसी बड़ी कृति उनके नाम से जुड़ी है। Google Play Books पर उनके लेखक-परिचय में उपन्यास, कहानियां, गद्य-गीत और कविता की रचना का उल्लेख है तथा जगद्गुरु शंकराचार्य उनके 10 उपन्यासों की शृंखला है। इसलिए विकल्प A नागर की साहित्यिक पहचान को सबसे ठीक पकड़ता है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) यह संकेत चन्द्रधर शर्मा गुलेरी से जुड़ा है, क्योंकि जून 1915 में सरस्वती में छपी उसने कहा था का श्रेय नागर को नहीं मिलता।
- (C) गदल और अल्प आयु में 11 कहानी-संग्रहों वाला परिचय रांगेय राघव से जुड़ा है, इसलिए इससे जनार्दन राय नागर की पहचान नहीं बनती।
- (D) इस आदमी को पढ़ो जैसी कृतियों से पहचाने गए रिपोर्ताज लेखक का संकेत सत्यनारायण से जोड़ा गया है, नागर से नहीं।
अवधारणा
राजस्थान के हिन्दी साहित्यिक इतिहास में लेखक, विधा और कृति की पहचान RAS के लिए महत्त्वपूर्ण है। एक ही लेखक को गद्य, उपन्यास, कहानी या रिपोर्ताज जैसी अलग-अलग धाराओं से मिलाकर पूछा जा सकता है।
