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RAS प्रश्न

राजस्थान के कला-इतिहास में मुकन्दरा की सही पहचान क्या है?

सही उत्तर: (A) हाड़ौती अंचल में गुप्त युग से जुड़ा मंदिर स्थल।

राजस्थान के कला-इतिहास में मुकन्दरा की पहचान हाड़ौती अंचल के गुप्त युग से जुड़े मंदिर-स्थल के रूप में की जाती है।

  1. (A)

    हाड़ौती अंचल में गुप्त युग से जुड़ा मंदिर स्थल

  2. (B)

    डूंगरपुर के पास प्रेमल देवी की बनवाई नौलखा बावड़ी

  3. (C)

    बूंदी की रानीजी की बावड़ी, जिसे 1699 में बनवाया गया

  4. (D)

    नोह की जाखबाबा प्रतिमा, जो शुंगकालीन कला से जुड़ी है

व्याख्या

मुकन्दरा बावड़ी या किसी अलग मूर्ति-उदाहरण के बजाय राजस्थान की गुप्त युगीन मंदिर-परंपरा से जुड़ा स्थल है। हाड़ौती अंचल के बचे हुए मंदिर-स्थलों में मुकन्दरा के साथ चारचौमा का शिव मंदिर भी गिना जाता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की दर्रा/मुकन्दरा प्रविष्टि भी इस पहचान को पुष्ट करती है: वहाँ स्थल को मंदिर, किले की दीवार और मूर्तियों से जोड़ा गया है, और संक्षिप्त इतिहास में दर्रा मुकन्दरा घाटी में गुप्तकालीन पत्थर के मंदिर, भिम-की-चौरी, का उल्लेख है। इसलिए मुकन्दरा की परीक्षा-योग्य पहचान हाड़ौती का गुप्त युगीन मंदिर-स्थल ही है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (B) नौलखा बावड़ी डूंगरपुर के पास प्रेमल देवी से जुड़ा अलग उदाहरण है; मुकन्दरा की पहचान इससे नहीं जुड़ती।
  • (C) रानीजी की बावड़ी बूंदी का अलग स्मारक है, जबकि मुकन्दरा बावड़ी नहीं, गुप्त युगीन मंदिर-स्थल है।
  • (D) नोह की जाखबाबा प्रतिमा शुंगकालीन कला से जुड़ा अलग उदाहरण है; मुकन्दरा दर्रा/मुकन्दरा का मंदिर, किले की दीवार और मूर्तियों वाला स्थल है।

अवधारणा

राजस्थान की प्राचीन कला और स्थापत्य में स्थल-पहचान की समझ RAS के लिए महत्वपूर्ण है। परीक्षा में ऐसे प्रसंग बार-बार आते हैं क्योंकि मंदिर, बावड़ी और मूर्ति-परंपरा के कई उदाहरण साथ पढ़े जाते हैं।

स्रोत

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