RAS प्रश्न
RBI द्वारा किए गए USD/INR बाय-सेल स्वैप में स्वैप की शुरुआत में निम्नलिखित में से क्या होता है?
सही उत्तर: (B) RBI बैंकों से डॉलर खरीदता है और रुपये देता है।
USD/INR बाय-सेल स्वैप की शुरुआत में RBI बैंकों से डॉलर खरीदता है और बदले में रुपये देता है, इसलिए रुपये की तरलता बढ़ती है।
व्याख्या
बाय-सेल स्वैप में क्रम को नाम से समझना जरूरी है: पहले ‘बाय’, फिर ‘सेल’। इसलिए स्वैप शुरू होते समय RBI बैंकों से डॉलर खरीदता है और उनके बदले रुपये देता है। यही कारण है कि पहले चरण में रुपये की तरलता प्रणाली में आती है। RBI की संबंधित प्रेस रिलीज के अनुसार, USD/INR बाय-सेल स्वैप नीलामी के पहले चरण में रुपये की तरलता जोड़ी जाती है। स्वैप की परिपक्वता पर यही लेनदेन उलट जाता है: RBI डॉलर वापस बेचता है और रुपये प्राप्त करता है। इसलिए शुरुआती चरण के लिए सही बात डॉलर खरीदना और रुपये देना है, न कि रुपये खींचना।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) परिपक्वता पर लेनदेन उलटी दिशा में होता है; शुरुआत में RBI डॉलर बेचकर रुपये नहीं लेता, बल्कि डॉलर खरीदकर रुपये देता है।
- (C) SLR बढ़ाना बैंकिंग नियमन का अलग उपाय है; USD/INR बाय-सेल स्वैप में तरलता पहले चरण के डॉलर-रुपया लेनदेन से आती है, SLR बदलाव से नहीं।
- (D) सरकारी बांड बेचना मुद्रा आपूर्ति घटाने का अलग बाजार-उपाय है, जबकि USD/INR बाय-सेल स्वैप की शुरुआती कार्रवाई डॉलर खरीदकर रुपये देना है।
अवधारणा
मौद्रिक नीति के तरलता प्रबंधन में RBI के विदेशी मुद्रा स्वैप साधन की दिशा समझना जरूरी है। RAS में ऐसे प्रश्न इसलिए दोहरते हैं क्योंकि एक जैसे दिखने वाले उपायों में पैसे की दिशा पहचानना अर्थव्यवस्था खंड का मुख्य कौशल है।
