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RAS प्रश्न

होयसल मंदिर स्थापत्य की विशेषता है:

सही उत्तर: (C) तारे के आकार का विन्यास और सोपस्टोन पर बारीक नक्काशी।

होयसल मंदिर स्थापत्य की पहचान तारे जैसी योजना और मुलायम क्लोराइट शिस्ट यानी सोपस्टोन पर की गई बारीक नक्काशी से होती है।

  1. (A)

    गुफा मंदिर

  2. (B)

    ऊँचे गोपुरम

  3. (C)

    तारे के आकार का विन्यास और सोपस्टोन पर बारीक नक्काशी

  4. (D)

    ईंटों से निर्माण

व्याख्या

होयसल मंदिरों की खासियत केवल सजावट नहीं, बल्कि पूरी स्थापत्य-योजना में दिखती है। इन मंदिरों में तारे जैसी योजना, खराद पर बने स्तंभ और मुलायम क्लोराइट शिस्ट यानी सोपस्टोन पर अत्यंत सूक्ष्म नक्काशी मिलती है। Karnataka Tourism भी हलेबीडु और बेलूर के होयसल मंदिरों को सोपस्टोन नक्काशी, तारे जैसे आधार-मंच और देवताओं, पशुओं तथा दैनिक जीवन की जीवंत आकृतियों वाली विशिष्ट शैली के रूप में बताता है। इसलिए सही पहचान C है: तारे के आकार की योजना और बारीक सोपस्टोन नक्काशी। यही संयोजन होयसल शिल्प को सामान्य मंदिर-निर्माण से अलग करता है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) गुफा मंदिर होयसल शैली की पहचान नहीं है, क्योंकि यहां मुख्य जोर तारे जैसी मंदिर-योजना और सोपस्टोन पर नक्काशी पर है।
  • (B) ऊँचे गोपुरम होयसल स्थापत्य की मुख्य विशेषता नहीं बनते, क्योंकि तारे जैसे आधार-मंच और सूक्ष्म नक्काशी इसकी पहचान हैं।
  • (D) ईंट निर्माण गलत है, क्योंकि होयसल मंदिर मुलायम क्लोराइट शिस्ट यानी सोपस्टोन पर की गई बारीक नक्काशी के लिए जाने जाते हैं।

अवधारणा

मध्यकालीन भारतीय मंदिर स्थापत्य में क्षेत्रीय शैलियों की पहचान महत्वपूर्ण है। RAS में ऐसी विशेषताएं बार-बार पूछी जाती हैं, क्योंकि एक-दो स्थापत्य संकेतों से वंश, काल और शैली पहचानी जाती है।

स्रोत

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