RAS प्रश्न
घाघरा-चोली-ओढ़नी किसकी पारंपरिक पोशाक है:
सही उत्तर: (D) राजस्थानी महिलाएँ।
घाघरा-चोली-ओढ़नी राजस्थानी महिलाओं की पारंपरिक पोशाक है।
व्याख्या
घाघरा-चोली-ओढ़नी को राजस्थानी महिलाओं की पारंपरिक तीन-भाग वाली पोशाक माना जाता है। घाघरा लंबी लहंगा-नुमा पोशाक है, चोली ऊपर पहना जाने वाला ब्लाउज है और ओढ़नी दुपट्टे या घूंघट की तरह पहनी जाती है। Travel.Earth के राजस्थान संस्कृति लेख में भी महिलाओं की पारंपरिक पोशाक के तहत यही बताया गया है कि महिलाएं सामान्यतः घाघरा, चोली और ओढ़नी पहनती हैं; घाघरा पूरी लंबाई का लहंगा-नुमा वस्त्र होता है, चोली उसके साथ पहना जाने वाला ब्लाउज है और ओढ़नी सिर ढकने के लिए इस्तेमाल होने वाला लंबा कपड़ा है। इसलिए यह पोशाक बच्चों, पुजारियों या पुरुषों की नहीं, राजस्थानी महिलाओं की पहचान से जुड़ती है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) केवल बच्चे सही नहीं है, क्योंकि घाघरा-चोली-ओढ़नी को राजस्थानी महिलाओं की पोशाक बताया गया है, बच्चों की अलग श्रेणी नहीं।
- (B) केवल पुजारी सही नहीं है, क्योंकि इस पोशाक का वर्णन धार्मिक पद या पुजारी-वर्ग से नहीं, महिलाओं की पारंपरिक पोशाक से जुड़ा है।
- (C) राजस्थानी पुरुष सही नहीं है, क्योंकि स्रोत पुरुषों की पारंपरिक पोशाक अलग बताता है, जबकि घाघरा-चोली-ओढ़नी महिलाओं के अंतर्गत दी गई है।
अवधारणा
यह प्रश्न राजस्थान की लोक-संस्कृति में पारंपरिक वेशभूषा की पहचान जाँचता है। RAS में कला-संस्कृति के छोटे तथ्यों से समुदाय, लिंग और क्षेत्रीय पहचान जोड़कर अक्सर ऐसे सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं।
