RAS प्रश्न
गणगौर उत्सव मुख्य रूप से किस देवता को समर्पित है?
सही उत्तर: (D) देवी पार्वती (गौरी)।
गणगौर उत्सव मुख्य रूप से देवी पार्वती, यानी गौरी, को समर्पित है।
व्याख्या
गणगौर में पूजा का केंद्र देवी गौरी, यानी पार्वती, हैं; भगवान इसर, यानी शिव, उनके साथ जुड़े हुए हैं। राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार "गण" शिव का और "गौरी" या "गौर" देवी पार्वती का संकेत है, और यह उत्सव दोनों के मिलन तथा दांपत्य सुख का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण सही उत्तर केवल शिव नहीं, बल्कि देवी पार्वती (गौरी) है। इस पूजा में महिलाएँ मिट्टी की गण और गौरी प्रतिमाओं की पूजा करती हैं। अविवाहित लड़कियाँ अच्छे पति के लिए आशीर्वाद मांगती हैं, जबकि विवाहित महिलाएँ अपने पति के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु के लिए प्रार्थना करती हैं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) देवी लक्ष्मी की पूजा दीपावली से जुड़ी मानी जाती है, जबकि गणगौर का केंद्र गौरी यानी पार्वती हैं।
- (B) भगवान शिव इसर के रूप में गणगौर में गौरी के साथ जुड़े हैं, पर उत्सव को केवल शिव को समर्पित कहना उसके मुख्य गौरी-केंद्र को गलत कर देता है।
- (C) भगवान कृष्ण की पूजा होली और जन्माष्टमी जैसे प्रसंगों से जुड़ी है; गणगौर में पूजा गण और गौरी, विशेषकर देवी पार्वती, की होती है।
अवधारणा
राजस्थान की लोक-आस्था और त्योहारों में देवता-सम्बंध की समझ RAS के लिए महत्वपूर्ण है। गणगौर जैसे पर्व कला-संस्कृति, स्त्री-आस्था और क्षेत्रीय परंपरा को सीधे जोड़ते हैं।
