RAS प्रश्न
गांधार कला, जो कुषाणों के अधीन विकसित हुई, की विशेषता है:
सही उत्तर: (B) बौद्ध मूर्तिकला पर ग्रीको-रोमन प्रभाव।
कुषाणों के अधीन विकसित गांधार कला की मुख्य विशेषता बौद्ध मूर्तिकला पर ग्रीक-रोमन शैली का प्रभाव है।
व्याख्या
गांधार कला का केंद्र पेशावर-तक्षशिला क्षेत्र माना जाता है और NCERT कला शिक्षा प्रशिक्षण पैकेज में कुषाण काल के संदर्भ में गांधार का मुख्य स्थल पेशावर घाटी है। कुषाण काल की गांधार मूर्तिकला पर ग्रीक कला का स्पष्ट प्रभाव दिखता है। इसलिए सही उत्तर बौद्ध मूर्तिकला पर ग्रीक-रोमन प्रभाव है। इस प्रभाव का सबसे बड़ा संकेत बुद्ध को प्रतीक के स्थान पर मानव रूप में दिखाना है। बुद्ध के प्रथम उपदेश वाली कुषाण-कालीन गांधार प्रतिमा में बुद्ध मानव रूप में दिखते हैं, जबकि सांची में उसी प्रसंग को चक्र जैसे प्रतीक से दिखाया गया है। ग्रीक टोगा जैसे वस्त्र, लहरदार बाल और यथार्थवादी शरीर-रचना इसी शैलीगत प्रभाव को पहचानने के आधार हैं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) मिस्री प्रभाव गांधार कला की पहचान नहीं है; कुषाण-कालीन गांधार मूर्तिकला पर ग्रीक कला का प्रभाव माना जाता है।
- (C) गांधार कला को केवल टेराकोटा आकृतियों तक सीमित नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह बौद्ध मूर्तिकला और बुद्ध की मानव-रूप प्रतिमा से जुड़ी है।
- (D) अमूर्त ज्यामितीय पैटर्न यहां केंद्रीय विशेषता नहीं हैं; गांधार कला में बुद्ध की मानव आकृति और ग्रीक शैली का प्रभाव प्रमुख है।
अवधारणा
प्राचीन भारत में कला-शैलियों और सांस्कृतिक संपर्कों की पहचान के लिए गांधार कला महत्वपूर्ण है। RAS में गांधार, मथुरा, सांची और कुषाण काल जैसे विषय बार-बार पूछे जाते हैं क्योंकि इनसे कला, धर्म और बाहरी शैलीगत प्रभावों को साथ समझना पड़ता है।
