RAS प्रश्न
मौलिक कर्तव्य हैं:
सही उत्तर: (B) DPSP की तरह न्यायालय में प्रवर्तनीय नहीं।
मौलिक कर्तव्य राज्य के नीति-निदेशक तत्वों की तरह गैर-न्यायसंगत हैं, इसलिए उन्हें मौलिक अधिकारों की तरह सीधे न्यायालय से प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता।
व्याख्या
मौलिक कर्तव्य संविधान के अनुच्छेद 51A में रखे गए हैं, लेकिन उनका स्वरूप सीधे मुकदमा करके लागू कराने वाला नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि ये मौलिक अधिकारों की तरह रिट से प्रवर्तनीय नहीं हैं। इसलिए उनका सबसे निकट स्वरूप राज्य के नीति-निदेशक तत्वों जैसा है: वे शासन और नागरिक आचरण के लिए संवैधानिक दिशा देते हैं, पर अदालत से सीधे लागू नहीं कराए जाते। फिर भी वे बेअसर नहीं हैं। सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार मौलिक कर्तव्य संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों की व्याख्या में मूल्यवान मार्गदर्शक हो सकते हैं, और कानून बनाने के आधार के रूप में भी काम कर सकते हैं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) मौलिक अधिकारों को अदालत में सीधे लागू कराया जा सकता है, जबकि मौलिक कर्तव्य रिट के जरिए सीधे प्रवर्तनीय नहीं हैं।
- (C) मौलिक कर्तव्य केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं हैं; वे भारत के नागरिकों से जुड़े कर्तव्य हैं।
- (D) मौलिक कर्तव्य नागरिकों और विदेशियों दोनों पर लागू नहीं होते; संविधान में ये भारत के नागरिकों के कर्तव्य हैं।
अवधारणा
संविधान में अधिकार, नीति-निदेशक तत्व और कर्तव्य के बीच फर्क RAS के लिए महत्त्वपूर्ण है। छोटे शब्दों, जैसे प्रवर्तनीय और गैर-न्यायसंगत, से विकल्प बदल जाता है।
