RAS प्रश्न
FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) FPI (विदेशी पोर्टफोलियो निवेश) से भिन्न है क्योंकि:
सही उत्तर: (D) FDI में उद्यम में स्थायी रुचि और महत्वपूर्ण नियंत्रण शामिल होता है, जबकि FPI निष्क्रिय निवेश है।
FDI में विदेशी निवेशक उद्यम में स्थायी रुचि और प्रबंधन पर महत्वपूर्ण नियंत्रण या प्रभाव रखता है, जबकि FPI शेयरों-बॉन्डों में बिना ऐसे नियंत्रण के निष्क्रिय निवेश होता है।
व्याख्या
IMF के अनुसार प्रत्यक्ष निवेश लंबे समय वाला सक्रिय निवेश होता है, जिसमें निवेशक किसी दूसरे देश के उद्यम में नियंत्रण पाने या प्रबंधन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालने के उद्देश्य से पैसा लगाता है; सामान्यतः इसमें कंपनी के कम से कम 10% शेयरों की हिस्सेदारी जुड़ती है। इसके उलट पोर्टफोलियो निवेश में निवेशक शेयर या बॉन्ड खरीदता है, अक्सर अल्पकालिक वित्तीय लाभ के लिए, और उद्यम के रोजमर्रा संचालन में सक्रिय भूमिका नहीं लेता। इसलिए FDI केवल वित्तीय संपत्ति खरीदना नहीं है; उसमें स्थायी रुचि, नियंत्रण/प्रभाव और लंबी अवधि का संकेत है, इसी कारण इसे FPI की तुलना में अधिक स्थिर माना जाता है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) यह क्रम उलटा कर देता है, क्योंकि FDI लंबी अवधि और स्थायी रुचि से जुड़ा होता है, जबकि FPI अपेक्षाकृत अल्पकालिक और जल्दी बेचे जा सकने वाला निवेश है।
- (B) यह गलत आधार बनाता है, क्योंकि फर्क निवेशक के सरकारी या निजी होने का नहीं, बल्कि उद्यम में नियंत्रण/प्रभाव बनाम निष्क्रिय वित्तीय निवेश का है।
- (C) यह भी उलटा है, क्योंकि FPI शेयरों, बॉन्डों और अन्य वित्तीय संपत्तियों में होता है, जबकि FDI कारखाने या उद्यम में प्रत्यक्ष हिस्सेदारी और नियंत्रण/प्रभाव से जुड़ सकता है।
अवधारणा
बाह्य क्षेत्र और पूंजी प्रवाह में FDI-FPI का वैचारिक अंतर महत्वपूर्ण है। RAS में यह बार-बार आता है क्योंकि निवेश, भुगतान संतुलन और आर्थिक स्थिरता वाले प्रश्नों में नियंत्रण, अवधि और जोखिम का फर्क निर्णायक होता है।
