RAS प्रश्न
फास्टैग किस तकनीक पर आधारित है?
सही उत्तर: (D) RFID (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन)।
फास्टैग रेडियो आवृत्ति पहचान (RFID) तकनीक पर आधारित है। इससे टोल व्यवस्था वाहन के आगे वाले शीशे पर लगे RFID टैग को पढ़कर अपने-आप टोल राशि वसूल कर लेती है।
व्याख्या
फास्टैग से टोल अपने-आप चुकाने में रेडियो आवृत्ति पहचान (RFID) तकनीक काम आती है। RFID टैग वाहन के आगे वाले शीशे पर लगा होता है। वाहन टोल प्लाजा से गुजरता है तो टोल लेन का रीडर टैग पहचान लेता है और फास्टैग से जुड़े खाते से टोल राशि कट जाती है। इसलिए सही उत्तर RFID है, न कि क्यूआर कोड, निकट-क्षेत्र संचार (NFC) या ब्लूटूथ। फास्टैग राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (NETC) कार्यक्रम के तहत चलता है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) इस कार्यक्रम का प्रबंधन करता है और भुगतान के समाशोधन व निपटान की सेवाएँ देता है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा प्रवर्तित भारतीय राजमार्ग प्रबंधन कंपनी लिमिटेड (IHMCL) कार्यक्रम को लागू करती है।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) क्यूआर कोड सही नहीं है, क्योंकि फास्टैग में क्यूआर कोड स्कैन नहीं किया जाता। यह वाहन के शीशे पर लगे रेडियो आवृत्ति पहचान (RFID) टैग से काम करता है, जिसे टोल लेन का रीडर पढ़ता है।
- (B) निकट-क्षेत्र संचार (NFC) सही नहीं है, क्योंकि फास्टैग टोल भुगतान के लिए रेडियो आवृत्ति पहचान (RFID) तकनीक का उपयोग करता है।
- (C) ब्लूटूथ सही नहीं है, क्योंकि फास्टैग टोल प्लाजा पर रेडियो आवृत्ति पहचान (RFID) टैग से काम करता है, न कि ब्लूटूथ से उपकरणों को जोड़कर।
अवधारणा
यह प्रश्न भारत के डिजिटल भुगतान और सड़क-परिवहन ढाँचे में इस्तेमाल होने वाली तकनीक की समझ जाँचता है। RAS में यह विषय भारतीय अर्थव्यवस्था के साथ-साथ परिवहन नीति, इलेक्ट्रॉनिक टोल व्यवस्था और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) जैसी भुगतान-संस्थाओं से भी जुड़ा है।
