RAS प्रश्न
गणगौर के दौरान महिलाओं द्वारा बनाई गई मिट्टी की मूर्तियों को क्या कहते हैं?
सही उत्तर: (C) ईसर और गौरी।
गणगौर में महिलाओं द्वारा बनाई जाने वाली मिट्टी की मूर्तियों के पारंपरिक नाम ईसर और गौरी हैं।
व्याख्या
गणगौर में मिट्टी की जोड़ी केवल सामान्य रूप से शिव-पार्वती नहीं कहलाती; महिलाएँ ईसर यानी शिव और गौरी यानी पार्वती की मिट्टी की मूर्तियाँ बनाती हैं, उन्हें सजाती हैं, 18 दिनों तक पूजा करती हैं और चैत्र शुक्ल तृतीया को जल में विसर्जित करती हैं। इसलिए प्रश्न में पूछा गया नाम देव-दंपती का सामान्य नाम नहीं, बल्कि लोक-परंपरा में चलने वाला नाम ईसर और गौरी है। उत्सव, पर्यटन मंत्रालय के मेवाड़ उत्सव पृष्ठ पर भी गणगौर/मेवाड़ उत्सव में ईसर और पार्वती-स्वरूप गंगौर की सजी मूर्तियों, गंगौर घाट पर पूजा और अर्पण का वर्णन है; इससे विकल्प C की पहचान पुष्ट होती है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) शिव-पार्वती वे देवता हैं जिनका प्रतिनिधित्व मूर्तियाँ करती हैं, लेकिन प्रश्न मिट्टी की मूर्तियों के लोक-नाम पूछता है; ये ईसर और गौरी कहलाती हैं।
- (B) राम-सीता गणगौर की मूर्तियों से जुड़े देव-युगल के रूप में नहीं आते; यहाँ संदर्भ शिव और पार्वती का है।
- (D) गण-गौर त्योहार का नाम है; मिट्टी की मूर्तियों के नाम ईसर और गौरी बताए गए हैं।
अवधारणा
यह प्रश्न राजस्थान की लोक-त्योहार परंपराओं में देवताओं के स्थानीय नाम और अनुष्ठान पहचानने की क्षमता जाँचता है। RAS में गणगौर जैसे त्योहार इसलिए दोहराए जाते हैं, क्योंकि कला-संस्कृति खंड में नाम, देव-संबंध, अवधि और अंतिम अनुष्ठान छोटे तथ्यों के रूप में पूछे जाते हैं।
