RAS प्रश्न
15 अप्रैल 2026 से प्रभावी राज्यसभा के पुनर्गठित उपसभापति पैनल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:\n1. पैनल में भाजपा, कांग्रेस, अन्नाद्रमुक तथा बीजद से लिए गए छह सदस्य हैं।\n2. उपसभापति केवल तब अध्यक्षता करते हैं जब राज्यसभा के सभापति अनुपस्थित हों; उपसभापति आसन उपसभापति पैनल को प्रत्यायोजित नहीं कर सकते।\n3. आसन पर रहते हुए उपसभापति पैनल का सदस्य वही शक्तियाँ प्रयोग करता है जो सभापति प्रयोग करते।\nऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
सही उत्तर: (B) केवल 1 और 3।
15 अप्रैल 2026 से प्रभावी राज्यसभा के पुनर्गठित उपसभापति पैनल में भाजपा, कांग्रेस, अन्नाद्रमुक और बीजद के 6 सदस्य हैं और आसन पर बैठने पर वे सभापति जैसी शक्तियां प्रयोग करते हैं।
व्याख्या
मुख्य फर्क पैनल की संरचना और अध्यक्षता के क्रम का है। पुनर्गठित पैनल में भाजपा से दिनेश शर्मा, एस. फांगनोन कोन्याक और घनश्याम तिवारी, कांग्रेस से फूलो देवी नेताम, अन्नाद्रमुक से एम. थंबीदुरई और बीजद से सस्मित पात्रा शामिल हैं, इसलिए कथन 1 सही है। पैनल का सदस्य सामान्यतः तभी सदन की अध्यक्षता करता है जब सभापति और उपसभापति दोनों अनुपस्थित हों; केवल सभापति की अनुपस्थिति पर्याप्त नहीं है, क्योंकि अगला क्रम उपसभापति का होता है। इसलिए कथन 2 गलत है। आसन पर रहते हुए ऐसा सदस्य कार्यवाही चलाने में सभापति जैसी शक्तियां प्रयोग करता है, इसलिए कथन 3 सही है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) A में कथन 2 भी सही मान लिया गया है, जबकि पैनल का सदस्य केवल सभापति की अनुपस्थिति में नहीं, बल्कि सभापति और उपसभापति दोनों की अनुपस्थिति में अध्यक्षता करता है।
- (C) C में कथन 1 छूट गया है, जबकि 15 अप्रैल 2026 से प्रभावी पैनल सचमुच भाजपा, कांग्रेस, अन्नाद्रमुक और बीजद से लिए गए 6 सदस्यों का है।
- (D) D में कथन 3 को छोड़ दिया गया है, जबकि आसन पर बैठे पैनल सदस्य को कार्यवाही चलाते समय सभापति जैसी शक्तियां मिलती हैं।
अवधारणा
राज्यसभा में अध्यक्षता के क्रम और पीठासीन अधिकारियों की शक्तियों की जांच होती है। RAS में संसदीय प्रक्रिया बार-बार पूछी जाती है, क्योंकि छोटे शब्दों जैसे 'केवल' और 'दोनों' से पूरा उत्तर बदल जाता है।
