RAS प्रश्न
14 फरवरी 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शहरी चुनौती कोष को मंजूरी दी। इसके बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस कोष के तहत केंद्रीय सहायता ₹1 लाख करोड़ है, जो परियोजना लागत का 50% वहन करती है। 2. शहरों को परियोजना लागत का कम से कम 50% भाग बाजार स्रोतों से जुटाना होगा। 3. योजना वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक चलेगी और इसे 2033-34 तक बढ़ाया जा सकता है। 4. इस कोष में केवल 50 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर पात्र हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
सही उत्तर: (B) केवल 2 और 3।
शहरी चुनौती कोष में सही कथन 2 और 3 हैं: शहरों को परियोजना लागत का न्यूनतम 50% बाजार स्रोतों से जुटाना होगा और योजना वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक, 2033-34 तक विस्तार योग्य, चलेगी।
व्याख्या
पत्र सूचना कार्यालय के अनुसार शहरी चुनौती कोष में कुल केंद्रीय सहायता ₹1 लाख करोड़ है, पर यह परियोजना लागत का 25% ही वहन करती है; इसलिए 50% केंद्रीय हिस्सा बताने वाला कथन गलत है। इसी ढांचे का मुख्य उद्देश्य बाजार-आधारित शहरी वित्त को बढ़ाना है, इसलिए परियोजना वित्त का न्यूनतम 50% बाजार स्रोतों से जुटाना होगा। इसी संयोजन से शहरी क्षेत्र में ₹4 लाख करोड़ के कुल निवेश को प्रेरित करने की बात कही गई है। योजना की अवधि वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक है और अमल की अवधि 2033-34 तक बढ़ाई जा सकती है। पात्रता भी केवल 50 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों तक सीमित नहीं है; स्रोत में 10 लाख या अधिक आबादी वाले शहर, राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों की राजधानियां और प्रमुख औद्योगिक शहर शामिल हैं, तथा सिद्धांततः सभी शहरों को शामिल बताया गया है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) A में कथन 1 शामिल है, जबकि केंद्रीय सहायता परियोजना लागत का 50% नहीं बल्कि 25% वहन करती है।
- (C) C में कथन 1 और 4 दोनों शामिल हैं; 50% केंद्रीय हिस्सा गलत है और पात्रता केवल 50 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों तक सीमित नहीं है।
- (D) D में कथन 4 शामिल है, जबकि पत्र सूचना कार्यालय के कवरेज विवरण में 50 लाख से अधिक आबादी की ऐसी अनिवार्य सीमा नहीं दी गई है।
अवधारणा
यह प्रश्न शहरी अवसंरचना वित्त और केंद्र सरकार की योजनाओं के वित्तीय ढांचे की समझ जांचता है। RAS में ऐसे प्रश्न बार-बार आते हैं क्योंकि कथनों में प्रतिशत, पात्रता और अवधि बदलकर तथ्यात्मक भ्रम पैदा किया जाता है।
