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RAS प्रश्न

अर्थशास्त्र के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: I. कौटिल्य (चाणक्य) का अर्थशास्त्र राजनीति, आर्थिक नीति और सैन्य रणनीति पर एक व्यापक ग्रंथ है। II. अर्थशास्त्र में कहा गया है कि राजा को सदैव धर्म (नैतिकता) का पालन करना चाहिए, भले ही वह राजनीति (राजनीतिक आवश्यकता) के विरुद्ध हो। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

सही उत्तर: (A) केवल I।

कौटिल्य का अर्थशास्त्र राजनीति, आर्थिक नीति और सैन्य रणनीति सहित राज्य-व्यवस्था का व्यापक ग्रंथ है, लेकिन यह राजा को हर परिस्थिति में धर्म को राजनीति से ऊपर रखने का नियम नहीं देता।

  1. (A)

    केवल I

  2. (B)

    केवल II

  3. (C)

    I और II दोनों

  4. (D)

    न I न II

व्याख्या

कथन 1 सही है क्योंकि ईज्ञानकोश की इकाई में कौटिल्य के अर्थशास्त्र को राजनीति, अंतरराष्ट्रीय संबंध, कूटनीति, सुरक्षा अध्ययन और अर्थशास्त्र जैसे क्षेत्रों में पढ़ा जाने वाला ग्रंथ बताया गया है; इसी स्रोत में इसे 15 भागों, 180 विभागों और 150 अध्यायों वाला कार्य भी कहा गया है। कथन 2 गलत है क्योंकि वह “सदैव” का पूर्ण नियम बना देता है। अर्थशास्त्र व्यावहारिक और यथार्थवादी है, और राज्य की सुरक्षा के लिए राजनीति/दंडनीति धर्म से ऊपर हो सकती है। स्रोत भी धर्मशास्त्र को सामाजिक, नैतिक और धार्मिक क्षेत्र से जोड़ता है, जबकि अर्थशास्त्र को अधिक राजनीतिक और आर्थिक प्रकृति का बताता है तथा कौटिल्य द्वारा राजनीति को धर्म से स्वतंत्र दर्जा देने की बात करता है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (B) कथन 2 अकेला सही नहीं हो सकता, क्योंकि इसमें राजा के लिए हर स्थिति में धर्म को राजनीति से ऊपर रखने की बात है, जबकि अर्थशास्त्र राज्य-हित और राजनीतिक यथार्थ को अलग महत्व देता है।
  • (C) दोनों कथन सही नहीं हैं, क्योंकि कथन 1 तो अर्थशास्त्र की व्यापक विषय-वस्तु बताता है, लेकिन कथन 2 उसके व्यावहारिक और राजनीतिक स्वरूप को गलत ढंग से नैतिक आदर्शवाद बना देता है।
  • (D) न 1 न 2 कहना गलत है, क्योंकि ईज्ञानकोश और व्याख्या दोनों अर्थशास्त्र को राजनीति, अर्थव्यवस्था और सैन्य/सुरक्षा विषयों को समेटने वाला व्यापक ग्रंथ मानते हैं।

अवधारणा

यह प्रश्न प्राचीन भारतीय राजनीतिक चिंतन में कौटिल्य के अर्थशास्त्र और धर्मशास्त्र से उसके फर्क को जांचता है। आरएएस में यह इसलिए बार-बार आता है क्योंकि राज्य, राजा, दंडनीति और नैतिकता के संबंध को समझे बिना कथन-आधारित इतिहास प्रश्नों में गलती होती है।

स्रोत

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