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RAS प्रश्न

राजस्थानी चित्रकला शैलियों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बूँदी शैली हरी-भरी वनस्पति और कमल-भरे तालाबों के चित्रण के लिए प्रसिद्ध है। 2. कोटा शैली दौड़ते पशुओं वाले गतिशील शिकार-दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। 3. दोनों शैलियों की आधार-परम्परा समान रही, पर 17वीं सदी के बाद उनका अलग विकास दिखाई देता है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

सही उत्तर: (B) 1, 2, और 3।

बूँदी शैली हरी-भरी वनस्पति और जलाशयों के चित्रण के लिए, कोटा शैली ऊर्जावान शिकार-दृश्यों के लिए जानी जाती है, और दोनों की साझा हाड़ौती आधार-परम्परा 1631 में कोटा के अलग राज्य बनने के बाद अलग धाराओं में विकसित हुई।

  1. (A)

    केवल 2 और 3

  2. (B)

    1, 2, और 3

  3. (C)

    केवल 1 और 3

  4. (D)

    केवल 1 और 2

व्याख्या

तीनों कथन सही हैं, क्योंकि प्रश्न बूँदी और कोटा की अलग पहचान के साथ उनकी साझा पृष्ठभूमि भी पूछता है। बूँदी चित्रकला में समृद्ध वनस्पति, जलाशय और कमल-भरे तालाब प्रमुख दृश्य-तत्व माने जाते हैं; दिए स्रोत में भी बूँदी शैली को हरी-भरी वनस्पति और विशिष्ट जल-चित्रण से जोड़ा गया है। कोटा शैली की पहचान ऊर्जावान शिकार-दृश्यों से बनती है, खासकर ऐसे संयोजन जिनमें दौड़ते पशु और गति का भाव साफ दिखता है। दोनों शैलियों की जड़ें हाड़ौती की साझा परम्परा में थीं। 1631 में राव माधो सिंह के अधीन कोटा अलग राज्य बना, इसलिए उसके बाद बूँदी और कोटा की चित्र-धाराएँ अलग पहचान लेने लगीं।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) A में कथन 1 छूट जाता है, जबकि बूँदी शैली की पहचान हरी-भरी वनस्पति, जलाशयों और कमल-भरे तालाबों के चित्रण से जुड़ी है।
  • (C) C में कथन 2 छूट जाता है, जबकि कोटा शैली ऊर्जावान शिकार-दृश्यों और दौड़ते पशुओं वाली रचनाओं के लिए जानी जाती है।
  • (D) D में कथन 3 छूट जाता है, जबकि बूँदी और कोटा की साझा हाड़ौती परम्परा 1631 में कोटा के अलग राज्य बनने के बाद अलग-अलग विकसित हुई।

अवधारणा

यह प्रश्न राजस्थानी चित्रकला में हाड़ौती क्षेत्र की बूँदी-कोटा शैलियों की विशेषताएँ और उनका ऐतिहासिक अलगाव परखता है। RAS में कला-संस्कृति के प्रश्न अक्सर शैलीगत पहचान, संरक्षण-क्षेत्र और कालक्रम को जोड़कर पूछे जाते हैं।

स्रोत

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