RAS प्रश्न
नालंदा विश्वविद्यालय के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करो: I. नालंदा को लगभग 1193–1203 ईसवी के आसपास बख़्तियार ख़िलजी ने नष्ट किया। II. चीनी यात्री शूऎनज़ांग (ह्यूएन त्सांग) ने हर्षवर्धन के शासनकाल में नालंदा का दौरा किया। III. नालंदा मुख्यतः थेरवाद बौद्ध धर्म का केंद्र था। IV. नालंदा का पुस्तकालय, धर्मगंज, रत्नसागर, रत्नोदधि और रत्नरंजक नाम की तीन बड़ी इमारतों से मिलकर बना था। ऊपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
सही उत्तर: (A) केवल I, II और IV।
नालंदा के बारे में कथन I, II और IV सही हैं: इसे लगभग 1193–1203 ईसवी में बख़्तियार ख़िलजी ने नष्ट किया, शूऎनज़ांग ने हर्षवर्धन के काल में यहां अध्ययन-प्रवास किया, और धर्मगंज पुस्तकालय रत्नसागर, रत्नोदधि तथा रत्नरंजक से मिलकर बना था।
व्याख्या
नालंदा पर प्रश्न का मुख्य फंदा बौद्ध परंपरा और संस्थागत विवरण को अलग-अलग पहचानने में है। बख़्तियार ख़िलजी ने लगभग 1193–1203 ईसवी में नालंदा को नष्ट किया, इसलिए कथन I सही है। शूऎनज़ांग का भारत प्रवास 629–645 ईसवी के आसपास था और यह हर्षवर्धन के शासनकाल 606–647 ईसवी में आता है; इसलिए कथन II भी सही है। कथन III गलत है, क्योंकि नालंदा को मुख्यतः महायान बौद्ध धर्म से जोड़ा गया है, थेरवाद से नहीं। धर्मगंज पुस्तकालय के बारे में स्रोत तीन बहुमंजिला भवनों, रत्नसागर, रत्नरंजक और रत्नोदधि, का उल्लेख करता है; इसलिए कथन IV सही है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) B में कथन III को सही मान लिया गया है, जबकि नालंदा मुख्यतः महायान बौद्ध धर्म से जुड़ा था, थेरवाद से नहीं।
- (C) C कथन I को छोड़ देता है, जबकि स्रोत बख़्तियार ख़िलजी द्वारा नालंदा के विनाश का आधार देता है।
- (D) D सभी कथनों को सही मानता है, पर कथन III गलत है क्योंकि नालंदा को थेरवाद नहीं, महायान परंपरा से मुख्य रूप से जोड़ा गया है।
अवधारणा
यह प्रश्न प्राचीन भारत के शिक्षा-केंद्रों और बौद्ध धर्म की शाखाओं की समझ जांचता है। RAS में नालंदा जैसे विषय बार-बार आते हैं क्योंकि इनमें यात्री-वृत्तांत, राजवंशीय कालक्रम और सांस्कृतिक संस्थान एक साथ जुड़ते हैं।
