RAS प्रश्न
भारतीय मूल्य अवधारणाओं के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: I. 'वसुधैव कुटुंबकम्' (संपूर्ण विश्व एक परिवार है) महा उपनिषद में पाई जाने वाली अवधारणा है। II. 'सर्व धर्म सम्भाव' (सभी धर्मों के लिए समान सम्मान) ऋग्वेद में स्पष्ट रूप से कही गई अवधारणा है। III. 'अहिंसा परमो धर्मः' (अहिंसा सर्वोच्च धर्म है) महाभारत में एक अवधारणा के रूप में आती है। उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
सही उत्तर: (B) केवल I और III।
वसुधैव कुटुंबकम् महा उपनिषद से जुड़ी अवधारणा है और अहिंसा परमो धर्मः महाभारत में मिलता है, लेकिन सर्व धर्म सम्भाव ऋग्वेद में स्पष्ट रूप से कही गई अवधारणा नहीं है।
व्याख्या
कथन I और III सही हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक पेज पर भारत की G20 अध्यक्षता की थीम वसुधैव कुटुंबकम् को महा उपनिषद के प्राचीन संस्कृत पाठ से लिया गया बताया गया है; इसका ग्रंथ-संदर्भ महा उपनिषद 6.71 से जुड़ता है। इसलिए कथन I सही है। कथन III भी सही है, क्योंकि अहिंसा परमो धर्मः महाभारत के आदि पर्व और अनुशासन पर्व में मिलता है। गड़बड़ी कथन II में है: सर्व धर्म सम्भाव ऋग्वेद में शब्दशः या स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया, बल्कि यह महात्मा गांधी द्वारा लोकप्रिय आधुनिक शब्दावली है। केवल I और III सही हैं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) A में कथन II को सही मान लिया गया है, जबकि सर्व धर्म सम्भाव ऋग्वेद में स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया; साथ ही कथन III भी सही है, इसलिए केवल I और II नहीं हो सकते।
- (C) C कथन I को छोड़ देता है, जबकि वसुधैव कुटुंबकम् महा उपनिषद से जुड़ा है और प्रधानमंत्री कार्यालय भी इसे महा उपनिषद से लिया गया बताता है।
- (D) D तीनों कथनों को सही मानता है, लेकिन कथन II गलत है क्योंकि सर्व धर्म सम्भाव वैदिक वाक्य के रूप में नहीं, आधुनिक शब्दावली के रूप में समझा जाता है।
अवधारणा
प्राचीन भारतीय मूल्य-अवधारणाओं के वास्तविक ग्रंथ-स्रोत और आधुनिक प्रयोग का फर्क RAS के लिए महत्वपूर्ण है। RAS में ऐसे तथ्य-आधारित मिलान बार-बार पूछे जाते हैं क्योंकि एक परिचित वाक्यांश को गलत ग्रंथ से जोड़कर विकल्प बनाए जाते हैं।
