RAS प्रश्न
ब्रह्मगुप्त के गणितीय योगदानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रह्मगुप्त शून्य से संबंधित अंकगणितीय क्रियाओं के स्पष्ट नियम देने वाले पहले विद्वान थे; इनमें किसी संख्या को शून्य से भाग देने का परिणाम भी शामिल था। 2. उन्होंने चक्रीय चतुर्भुज के क्षेत्रफल का सूत्र प्रतिपादित किया, जिसे आज ब्रह्मगुप्त सूत्र कहा जाता है। 3. ब्रह्मगुप्त की प्रमुख कृति ब्रह्मस्फुटसिद्धांत 628 ई. की है। उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
सही उत्तर: (C) तीनों।
ब्रह्मगुप्त ने ब्रह्मस्फुटसिद्धांत में शून्य पर अंकगणितीय नियम दिए, चक्रीय चतुर्भुज के क्षेत्रफल का सूत्र दिया, और यह कृति 628 ई. में भिल्लमाल, आज के भिनमाल, में रची गई थी।
व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। ब्रह्मस्फुटसिद्धांत में ब्रह्मगुप्त ने शून्य को किसी संख्या में जोड़ने, घटाने और उससे गुणा करने के नियम दिए: संख्या में शून्य जोड़ने या घटाने पर संख्या नहीं बदलती और शून्य से गुणा करने पर गुणनफल शून्य होता है। इसी चर्चा में उन्होंने शून्य से भाग तक नियम बढ़ाने की कोशिश की; 0 ÷ 0 = 0 वाला निष्कर्ष आज गलत माना जाता है, पर शून्य के लिए व्यवस्थित नियम देने में यह बड़ा कदम था। उसी कृति में चक्रीय चतुर्भुज के क्षेत्रफल के लिए √[(s−a)(s−b)(s−c)(s−d)] सूत्र मिलता है। MacTutor के अनुसार ब्रह्मस्फुटसिद्धांत 628 ई. में भिल्लमाल, आज के भिनमाल, में लिखा गया था।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) A इसलिए गलत है क्योंकि केवल एक नहीं, शून्य के नियम, चक्रीय चतुर्भुज का क्षेत्रफल-सूत्र और 628 ई. में रची गई ब्रह्मस्फुटसिद्धांत की बात, तीनों सही हैं।
- (B) B इसलिए गलत है क्योंकि 0 ÷ 0 = 0 वाला निष्कर्ष त्रुटिपूर्ण होने पर भी कथन 1 में शून्य पर नियम देने और शून्य से भाग का परिणाम शामिल होने की बात सही रहती है, इसलिए सही कथन दो नहीं बल्कि तीन हैं।
- (D) D इसलिए गलत है क्योंकि ब्रह्मस्फुटसिद्धांत में शून्य संबंधी अंकगणित और चक्रीय चतुर्भुज का क्षेत्रफल-सूत्र दर्ज हैं, और उसी कृति का समय 628 ई. बताया गया है।
अवधारणा
यह प्रश्न प्राचीन भारतीय गणित और विज्ञान-इतिहास में ब्रह्मगुप्त के योगदान की पहचान जांचता है। RAS में ऐसे तथ्य इसलिए बार-बार आते हैं क्योंकि राजस्थान के भिनमाल से जुड़ा बौद्धिक इतिहास और भारतीय गणित की मूल उपलब्धियां, दोनों एक साथ पूछे जा सकते हैं।
