RAS प्रश्न
CJI सूर्य कांत ने पेपरलेस अदालत को किस अवधारणा की दिशा में कदम बताया?
सही उत्तर: (C) हरित न्यायशास्त्र।
CJI सूर्य कांत ने पेपरलेस अदालत को हरित न्यायशास्त्र और न्याय तक पहुंच को अधिक लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में कदम बताया।
व्याख्या
पेपरलेस अदालत का मुख्य भाव केवल कागज हटाना नहीं है, बल्कि न्याय-प्रक्रिया को पर्यावरण-सचेत और अधिक सुलभ बनाना है। वायनाड के कल्पेट्टा न्यायिक जिले में पूरी जिला-स्तरीय न्यायपालिका को पूरी तरह डिजिटल प्रणाली में बदला गया, जहाँ दाखिलियाँ ऑनलाइन होंगी, इलेक्ट्रॉनिक रूप से देखी जाएँगी और अदालतों तक तुरंत पहुँचेंगी। इसी बदलाव को CJI सूर्य कांत ने हरित न्यायशास्त्र कहा, क्योंकि न्याय पाने के लिए पर्यावरणीय संसाधनों की बलि नहीं देनी चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पेपरलेस व्यवस्था भौतिक दूरी घटाती है और नागरिकों को न्याय-प्रणाली के करीब लाती है, इसलिए यह न्याय तक पहुँच को लोकतांत्रिक बनाने से जुड़ती है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) डिजिटल साधन पेपरलेस अदालत का माध्यम हैं, लेकिन CJI सूर्य कांत ने पेपरलेस अदालत को जिस अवधारणा से जोड़ा, वह हरित न्यायशास्त्र थी।
- (B) पेपरलेस अदालत से पारदर्शिता और पहुँच को लाभ मिलता है, पर CJI सूर्य कांत ने इसे खुला न्यायशास्त्र नहीं कहा।
- (D) स्मार्ट न्यायशास्त्र तकनीक-आधारित सुधार जैसा लगता है, लेकिन CJI सूर्य कांत के कथन में पेपरलेस अदालत के लिए यह शब्द नहीं था।
अवधारणा
न्यायपालिका में तकनीक, पर्यावरण-संवेदनशील प्रशासन और न्याय तक पहुँच का आपसी संबंध शासन-सुधार की समझ के लिए महत्वपूर्ण है। RAS में शासन-सुधार को केवल डिजिटल सुविधा नहीं, बल्कि समानता और सार्वजनिक सेवा के नजरिये से भी पढ़ना होता है।
