RAS प्रश्न
चैतन्य महाप्रभु का दर्शन किस नाम से जाना जाता है?
सही उत्तर: (D) अचिन्त्य भेदाभेद।
चैतन्य महाप्रभु का दर्शन अचिन्त्य भेदाभेद कहलाता है, जिसमें आत्मा को ईश्वर से एक साथ अभिन्न भी और भिन्न भी माना जाता है।
व्याख्या
चैतन्य महाप्रभु (1486-1534) ने अचिन्त्य भेदाभेद का प्रतिपादन किया। इस मत में आत्मा और ईश्वर के संबंध को केवल अभेद या केवल भेद में नहीं बांधा जाता; आत्मा ईश्वर से एक भी है और अलग भी। चैतन्य द्वारा स्थापित गौड़ीय संप्रदाय में अचिन्त्य भेदाभेद ईश्वर और जगत के संबंध की अकल्पनीय द्वैत-अद्वैत स्थिति है। इसी कारण विकल्प D सही है। बंगाल में उत्साहपूर्ण कीर्तन और राधा-कृष्ण की पूजा को लोकप्रिय करने वाली चैतन्य परंपरा इसी वैष्णव भक्ति-दर्शन से जुड़ी है, जबकि बाकी विकल्प अलग आचार्यों के दार्शनिक मत हैं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) अद्वैत शंकराचार्य का दर्शन है, इसलिए यह चैतन्य महाप्रभु के दर्शन की पहचान नहीं है।
- (B) विशिष्टाद्वैत रामानुज से जुड़ा दर्शन है, जबकि चैतन्य महाप्रभु का मत अचिन्त्य भेदाभेद है।
- (C) द्वैत माध्व का दर्शन है; चैतन्य महाप्रभु का मत आत्मा और ईश्वर में भेद तथा अभेद दोनों को साथ रखता है।
अवधारणा
मध्यकालीन भक्ति आंदोलन में वैष्णव आचार्यों और उनके दार्शनिक मतों की पहचान महत्वपूर्ण है। RAS में ऐसे प्रश्न इसलिए दोहराए जाते हैं क्योंकि आचार्य, क्षेत्र, उपासना-पद्धति और दर्शन को मिलाकर पूछा जाता है।
