RAS प्रश्न
बौद्ध धर्म किसकी अवधारणा को अस्वीकार करता है?
सही उत्तर: (A) स्थायी आत्मा — अनात्मन यानी अनत्ता का सिद्धांत।
बौद्ध धर्म का अनात्मन या अनत्ता सिद्धांत स्थायी, अपरिवर्तनीय आत्मा की अवधारणा को अस्वीकार करता है।
व्याख्या
अनात्मन, यानी अनत्ता, बौद्ध दर्शन का मूल सिद्धांत है। बौद्ध धर्म स्थायी और अपरिवर्तनीय आत्मन को नहीं मानता। Britannica के अनत्ता लेख के अनुसार मनुष्य में ऐसी कोई स्थायी मूल सत्ता नहीं है जिसे आत्मा कहा जाए; व्यक्ति पाँच बदलते हुए स्कंधों से बना माना जाता है। ये पाँच स्कंध रूप, वेदना, संज्ञा, संस्कार और विज्ञान हैं। इसलिए बौद्ध मत में जिसे सामान्य तौर पर “स्व” समझा जाता है, वह स्थायी आत्मा नहीं बल्कि बदलते घटकों का समूह है। इसी कारण यह हिंदू आत्मन-मान्यता और जैन जीव-मान्यता से अलग खड़ा होता है, जबकि कर्म और पुनर्जन्म को आत्मा के स्थायी संचरण के रूप में नहीं समझता।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) कर्म सही विकल्प नहीं है, क्योंकि बौद्ध धर्म कर्म को स्वीकार करता है; अस्वीकृति स्थायी आत्मा की है।
- (C) पुनर्जन्म सही विकल्प नहीं है, क्योंकि बौद्ध धर्म पुनर्जन्म को मानता है, पर उसे स्थायी आत्मा के संचरण के रूप में नहीं समझता।
- (D) ध्यान सही विकल्प नहीं है, क्योंकि यह अनात्मन सिद्धांत द्वारा अस्वीकार की गई स्थायी आत्मा की अवधारणा नहीं है।
अवधारणा
प्राचीन भारतीय धार्मिक दर्शन में बौद्ध धर्म का अनात्मन सिद्धांत आत्मन और जीव जैसी धारणाओं से अलग है। RAS में बौद्ध, हिंदू और जैन दर्शन के मूल वैचारिक फर्क को सीधे परखा जाता है।
