RAS प्रश्न
भास्कर II (भास्कराचार्य, 12वीं शताब्दी) ने लिखा:
सही उत्तर: (A) सिद्धांत शिरोमणि (लीलावती - अंकगणित, और बीजगणित सहित)।
भास्कर II ने 1150 ई. में सिद्धांत शिरोमणि लिखी, जिसके भाग लीलावती, बीजगणित, गोलाध्याय और ग्रहगणित हैं।
व्याख्या
भास्कर II या भास्कराचार्य का संबंध 12वीं शताब्दी की भारतीय गणित और खगोल-परंपरा से है। उनका जन्म 1114 ई. में हुआ और उन्हें उज्जैन की गणितीय-खगोलीय परंपरा का प्रमुख माना गया। सिद्धांत शिरोमणि 1150 ई. में लिखी गई और इसके 4 भाग माने जाते हैं: लीलावती, जो अंकगणित से जुड़ी है; बीजगणित, जो बीजगणित का ग्रंथ है; गोलाध्याय, जो गोलक या आकाशीय गोले से जुड़ा है; और ग्रहगणित, जो ग्रहों की गणना से संबंधित है। इसलिए सही पहचान सिद्धांत शिरोमणि है, न कि किसी अन्य आचार्य या परंपरा का ग्रंथ।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) अर्थशास्त्र भास्कर II की गणितीय-खगोलीय रचना नहीं है; 12वीं शताब्दी के भास्कराचार्य से जुड़ी सही रचना सिद्धांत शिरोमणि है।
- (C) आर्यभटीय नाम से ही आर्यभट की परंपरा से जुड़ा ग्रंथ है; भास्कर II से सिद्धांत शिरोमणि, लीलावती और बीजगणित जुड़े हैं।
- (D) ब्रह्मस्फुटसिद्धांत भास्कर II का ग्रंथ नहीं है; भास्कर II की रचना सिद्धांत शिरोमणि है और उसके भाग लीलावती, बीजगणित, गोलाध्याय और ग्रहगणित हैं।
अवधारणा
प्राचीन-मध्यकालीन भारत में गणित और खगोल-विज्ञान की ग्रंथ-परंपरा की पहचान महत्वपूर्ण है। RAS में लेखक, ग्रंथ और विषय-क्षेत्र को मिलाकर तथ्यात्मक समझ परखी जाती है।
