RAS प्रश्न
बेणेश्वर मेला किन नदियों के संगम पर लगता है?
सही उत्तर: (B) सोम, माही और जाखम।
बेणेश्वर मेला डूंगरपुर जिले में सोम, माही और जाखम नदियों के संगम पर लगता है।
व्याख्या
बेणेश्वर मेले की पहचान उसके स्थान से जुड़ी है: यह डूंगरपुर जिले में सोम, माही और जाखम नदियों के संगम पर लगता है। राजस्थान पर्यटन के डूंगरपुर पेज पर बेणेश्वर को माही, सोम और जाखम नदियों के संगम पर लगने वाला सबसे बड़ा जनजातीय मेला बताया गया है। इसी कारण विकल्प B सही है। मेले का समय भी याद रखने लायक है: यह माघ पूर्णिमा पर, सामान्यतः जनवरी-फरवरी के समय, आयोजित होता है। इसे राजस्थान का सबसे बड़ा जनजातीय मेला और वागड़ क्षेत्र का कुंभ कहा जाता है। बेणेश्वर मेले में नदी-संगम, डूंगरपुर और जनजातीय संस्कृति, तीनों बातें एक साथ जुड़ती हैं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) आहू और काली सिंध का संबंध गागरोन किले के क्षेत्र से जोड़ा जाता है, जबकि बेणेश्वर मेले का स्थान सोम, माही और जाखम का संगम है।
- (C) लूनी और जवाई का संगम पाली/बाड़मेर क्षेत्र से जुड़ा है, इसलिए यह डूंगरपुर के बेणेश्वर मेले वाला नदी-संगम नहीं है।
- (D) चंबल और बनास का संगम सवाई माधोपुर के पास माना जाता है, जबकि बेणेश्वर मेला डूंगरपुर में सोम, माही और जाखम के संगम पर लगता है।
अवधारणा
राजस्थान की जनजातीय संस्कृति, मेले और नदी-संगम आधारित स्थलों में बेणेश्वर मेला प्रमुख उदाहरण है। RAS में ऐसे तथ्य बार-बार आते हैं क्योंकि वे भूगोल और संस्कृति को एक ही तथ्य में जोड़ते हैं।
